aaj ka sawal hindi

जब ये दुन्या, सुरज, चांद, आसमान, ज़मीन नहीं थे तो पहले क्या था ?

इंसान कब से है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

पहले इस दुन्या में न इंसान था, न फ़रिश्तें, न आस्मान, न ज़मीन थी,

सिर्फ एक ज़ात जो हमेशा से थी और हमेशा रहेगी, अपनी तमाम सिफ़त के साथ मव्जूद थी।

फिर उस बे मिसल अल्लाह त’आला ने अपनी चाहत और ईरादे से ज़मीन, आसमान और तमाम मख़लूक़ात और आखीर में आदम अलैहिस्सलाम और उन की अवलाद को पैदा किया।

(मुइनूल अक़ाइद सफा १२)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

१५ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

कया हुज़ूर ﷺ ने अपनी बेटी फातिमा रदियल्लाहु अन्हा को जहेज़ दिया था ?

और हज़रत अली रदियल्लाहु अन्हु ने लिया था ?

उस की क्या हकीकत है ?

इस से तो जहेज़ का सुबूत मिल रहा है !!

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

हज़रत अली रदियल्लाहु अन्हु के वालिद अबू तालिब निहायत गरीब थे, उन से हुज़ूर ﷺ ने हज़रत अली को परवरीश के लिए मांग लिया था, उन के पास शादी के बाद बीवी के साथ अलग रहने के लिए घर की बुनयादी ज़रूरत का घरेलु सामन भी न था, इसलिए हुज़ूर ﷺ ने खुद इन्तिज़ाम किया, वह भी सिर्फ अपनी बेटी फ़ातिमा को ही जहेज़ दिया, इस के अलावह किसी भी बेटी को जहेज़ नहीं दिया।

आजकल भी कोई ऐसा दूल्हा हो जिस के पास बीवी के साथ अलग रहने के लिए ज़रूरी सामान का इंतिज़ाम न हो तो वह भी जहेज़ ले सकता है, लेकिन माँगने का हक़ नहीं।

घरेलु सामान घर का इंतिज़ाम ये दूल्हे या उस के घरवालों ज़िम्मेदारी है, बीवी के घरवालों की ज़िम्मेदारी नहीँ।

बहिश्ती जहेज़ सफा १२२ से माखूज़

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

०२ रबीउल उल आखर १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

⭕आज का सवाल नंबर २५२४⭕

हुज़ूर सल्लल्लाहु अलय्हि व आलिहि वसल्लम की विलादत और वफ़ात की उर्दु और अंग्रेजी तारिख क्या है ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

🌹नबियों के इमाम, बा’इस ए तख़लीक़ ए का’यनात सल्लल्लाहु अलैहि व आलिहि वसल्लम की यौमे विलादत याने पैदा’ईश ए मुबारक का दिन “पीर” याने सोमवार है।

ओर तारिख ए विलादत ए शरीफ़ा याने पैदाइश की तारिख में मुख़्तलिफ़ अक़वाल किताबों में मिलते है।

मगर मुहक़्क़िक़ीन की एक जमात ने रबी’ऊल अव्वल की ८ तारिख को और दूसरी जमात ने ९ तारिख को सहीह क़रार दिया है।

फ़िरक़ाह ए रज़विय्यह (बरेल्वियत/रज़ाख़ानीयत) के बानी ओ पेश्वा अहमद रजाखान साहब बरेलवी ने भी मुहक़्क़िक़ीन की पहली जमात की मुआफ़क़ात करते हुवे फतावा रिज़विया जिल्द २६ में ८ तारिख को सहीह माना है।

ओर अंग्रेजी ऐतिबार से २० अप्रैल ५७१ ईस्वी को सुबह सादिक़ के वक़्त ४:२० सुबह को हुवि थी।
📘रवज़तुल ओफ़ माहिरीन फलाकियत अल्लामा सुहैली रहमतुल्लाही अलय्हि
१/२८२
📕 अर रहीक़ुल मखतूम

ओर आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम की यौम ए वफ़ात भी पीर याने सोमवार का दिन है।

ओर तारीख ए वफ़ात मष्’हूर क़ौल के मुताबिक रबी उल अव्वल की १२वी तारिख है।
इसी लिए अवाम में यह तारिख १२ वफ़ात से मष्’हूर है।

अगरचे यह मष्’हूर क़ौल भी दुरुस्त नहीं है।
विलादत का १२ रबीउल अव्वल मशहूर कौल दुरुस्त नहि है, क्यूँ के पीर का दिन किसी भी तरह फिट नहीं होता, गोया जो लोग १२ रबीउल अव्वल को विलादत समझ कर खुशिया मनाते हैं हकीकत में शैतान उनसे वफ़ात पर खुशिया मनवा रहा है,
खुशिया न मानाने वालों को इब्लीस केहने वाले खुद ही इब्लीस बन रहे है,
क्यूँ के वफ़ात के दिन इब्लीस और इब्लीस की पैरवी करने वालों ने खुशियां मनाई थी।

و الله اعلم بالصواب