दुनिया से पहले क्या था ? १६१५

जब ये दुन्या, सुरज, चांद, आसमान, ज़मीन नहीं थे तो पहले क्या था ?

इंसान कब से है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

पहले इस दुन्या में न इंसान था, न फ़रिश्तें, न आस्मान, न ज़मीन थी,

सिर्फ एक ज़ात जो हमेशा से थी और हमेशा रहेगी, अपनी तमाम सिफ़त के साथ मव्जूद थी।

फिर उस बे मिसल अल्लाह त’आला ने अपनी चाहत और ईरादे से ज़मीन, आसमान और तमाम मख़लूक़ात और आखीर में आदम अलैहिस्सलाम और उन की अवलाद को पैदा किया।

(मुइनूल अक़ाइद सफा १२)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

१५ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

हज़रत फ़ातिमा रदियल्लाहु अन्हा के जहेज़ की हक़ीक़त १५७२

कया हुज़ूर ﷺ ने अपनी बेटी फातिमा रदियल्लाहु अन्हा को जहेज़ दिया था ?

और हज़रत अली रदियल्लाहु अन्हु ने लिया था ?

उस की क्या हकीकत है ?

इस से तो जहेज़ का सुबूत मिल रहा है !!

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

हज़रत अली रदियल्लाहु अन्हु के वालिद अबू तालिब निहायत गरीब थे, उन से हुज़ूर ﷺ ने हज़रत अली को परवरीश के लिए मांग लिया था, उन के पास शादी के बाद बीवी के साथ अलग रहने के लिए घर की बुनयादी ज़रूरत का घरेलु सामन भी न था, इसलिए हुज़ूर ﷺ ने खुद इन्तिज़ाम किया, वह भी सिर्फ अपनी बेटी फ़ातिमा को ही जहेज़ दिया, इस के अलावह किसी भी बेटी को जहेज़ नहीं दिया।

आजकल भी कोई ऐसा दूल्हा हो जिस के पास बीवी के साथ अलग रहने के लिए ज़रूरी सामान का इंतिज़ाम न हो तो वह भी जहेज़ ले सकता है, लेकिन माँगने का हक़ नहीं।

घरेलु सामान घर का इंतिज़ाम ये दूल्हे या उस के घरवालों ज़िम्मेदारी है, बीवी के घरवालों की ज़िम्मेदारी नहीँ।

बहिश्ती जहेज़ सफा १२२ से माखूज़

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

०२ रबीउल उल आखर १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.