aaj ka sawal hindi

तकदीर पर ईमान लाने का क्या तक़ाज़ा है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

हर नापसंद चीज़ और नुक़्सान से बचने के अस्बाब इख़्तियार करे, और नुक़्सान से बचने की पूरी कोशिश करे।

फिर भी नुक़्सान हो जाये तो परेशान न हो, यूँ समझे यही मेरे मुक़द्दर में था।

अल्लाह हमारा मालिक है, हमें उस के फैसले पर राज़ी रहना वाजिब है। यही तकदीर पर ईमान का तक़ाज़ा है।

ईस्लामी अक़ाइद सफा ३९

و الله اعلم بالصواب

हिजरी तारीख़ : ०५ / जमादीउल अव्वल ~ १४४१ हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा व सेक्रेटरी जमीयते उलमा सूरत शहर, गुजरात, इंडिया

 

याजूज माजूज के बारे में क्या अक़ीदा रखना चाहिए ?

जवाब
حامدا و مصلیا مسلما

याजूज माजूज ज़बरदस्त इंसान हैं, जो दज्जाल के क़त्ल होने के बाद अल्लाह उन को निकालेंगे, जो बड़ा फसाद मचायेंगे, ईसा अलैहिससलाम की बददुआ से उन को बीमारी होगी, जिस से वह सब ख़त्म हो जाएंगे।

मुस्लिम शरीफ हज़रत नवास इब्ने समआन रदि. की रिवायात से माखूज़

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
१९ज़िल हिज्जह१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

 

कुरान में “दाब्बतुल अर्द” निकलने का ज़िक्र है। उस की क्या हकीकत है ?

जवाब
حامدا و مصلیا مسلما

हज़रात हुज़ैफ़ा रदिअल्लाहु अन्हु से रिवायात है के :
कयामत उस वक़्त तक क़ाइम न होगी जब तक के तुम पेहली दस (१०) निशानियों को न देख लो, जिस में ये अज़ीब तरह की पैदाइश का जानवर भी जो क़यामत की बिलकुल आखरी अलामतों में से है।

इब्ने कसीर अबू दावूद तयलीसी के हवाले से नक़ल किया है के :

ये जानवर मक्का में सफा पहाड़ी से अपने सर पर से मिटटी झाड़ते हुवे निकलेगा और हज्रे अस्वद और मक़ामे इब्राहीम के दरमियान पहोंच जाएगा, उस को देखकर लोग भागने लगेंगे,

एक जमात ठहेर जाएगी, ये उन के चेहरे को सितारों की तरह रोशन कर देगा,  फिर ज़मीन की तरफ निकलगा, हर क़ाफ़िर की पेषानी पर क़ाफ़िर होने का निशान लगा देगा, कोई उस की पकड़ से भाग न सकेगा, ये मुसलमान और क़ाफ़िर को अच्छी तरह पहचानेगा।

मारीफुल क़ुरान सुरहे नमल आयत ८२ की तफ़्सीर

नोट : इस जानवर के बारे मुख़्तलिफ़ क़िस्म की मनघडत बातें मेसेज में चलती रहती है के उस का मुंह फुलां जानवर की तरह, पेर फुलां जानवर की तरह, वग़ैरह बातें सहीह नहीं है।

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
२०ज़िल हिज्जह१४४० हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

दूसरी आसमानी किताब भी अल्लाह तआला ने ही नाज़िल की है तो उस पर अमल कर सकते है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

कुरान नाज़िल होने के बाद अगली तमाम आस्मानी किताब मंनसूख और रद हो गई, अब वह किताबेँ असली शकल पर महफ़ूज़ नहीं, और उन पर अमल करना जाइज़ नहीं।

क़ुरान की हिफाज़त का वादा अल्लाह तआला ने किया है।  जैसा नाज़िल हुवा था आज भी वेसा ही मव्जूद है। उस में किसी क़िस्म की कमी हुई है, न इजाफ़ा, और क़यामत तक इसी तरह महफ़ूज़ रहेंगा।

(इस्लामी अक़ाइद सफा १८)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

२१ जुमाद अल उखरा १४४० हिजरी

(मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

 

आसमानी किताबेँ कोन कोन सी है ? और किस किस नबी पर नाज़िल हुई ? उस को हम पढ़ सकते है या नहीं ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

आसमानी मशहूर  किताबेँ ४ है।

तौरात हज़रत मूसा अलैहिस सलाम पर,

इंजील हज़रत इसा अलैहिस सलाम पर,

ज़बूर हज़रत दावूद अलैहिस सलाम पर और

क़यामत तक के लिए आखरी किताब क़ुरान हमारे नबी हुज़ूर सलल्लाहु अलय्हि वसल्लम पर नाज़िल हुई।

दूसरी किताबों को गुमराह और आवारा मिजाज़ लोगों ने बहुत कुछ बदल डाला है, वह किताबेँ सब हक़ और सच थी, उस असल किताब पर हमारा इमान है, उसी में अपने अपने ज़माने के नबीयों की उम्मत के लिए नजात रही, लेकिन अब असल शकल में वह किताबेँ महफ़ूज़ नहीं,

लिहाज़ा जो बातें क़ुरान और हदीस के मुवाफ़िक़ होगी उसे हम मानेँगे, और जो मुख़ालिफ़ होगी उसे नहीं मानेँगे, और जो न मुवाफ़िक़ हो न मुख़ालिफ़ उस बारे में हम खामोश है।

(इस्लामी अक़ाइद सफा १७,१८ से माखूज़)

و الله اعلم بالصواب

(इस्लामी तारीख़

२० जुमाद अल उखरा १४४० हिजरी)

(मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

वफात के बाद हुजूर सल्लल्लाहु अलयही वसल्लम, अम्बिया, सीद्दीकीन, शुहदा और वलियों का वसीला उलमाए देवबंद के नजदीक ज़ायज़ है या नाजायज..?

ज़वाब

حامدا و مصلیا و مسلما

हमारे नजदिक और हमारे मशाइख के नजदीक दुआओं में इन तमाम का वसीला ज़ायज़ है, उनकी हयाती में हो या वफात के बाद इस तौर पर कहे के या अल्लाह मैं फुलां बुजुर्ग के वसीले से तुझसे दुआ की कुबुलीयत और हाजत बरारी मांगता हूँ. या इस जैसे और कोई कलीमात कहे.

(अल मुहन्नद यानी अकाईदे उलमाऐ देवबन्द, सफ़ा १०)

و الله اعلم بالصواب

(इस्लामी तारीख़

१९ जुमाद अल उखरा १४४० हिजरी)

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

 

 

आसमानी किताब और सहीफे किसे कहते है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

अल्लाह तआला ने हज़रत जिब्राईल अलैहिससलाम के ज़रिये से आसमान से छोटी बड़ी बहुत सी किताब अपने नबीयों पर उतारी,  ताके वह अपनी अपनी उम्मत को दीन की बातें बताये।

उन में से छोटी किताब को सहीफे,

और बड़ी किताब को अल्लाह की किताब कहते है।

(इस्लामी अक़ाइद सफा १२)

و الله اعلم بالصواب

(इस्लामी तारीख़

०६ जुमाद अल उखरा १४४० हिजरी)

(मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

जिन्नात किसे कहते है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

अल्लाह तआला ने बाज़ मख्लूक़ को आग से बनाया है, और वह हम को दिखाई नहीं देते, उन को जीन कहते है।

उन में अचछे और बुरे सब तरह के होते है, उन की अवलाद भी होती है, उन में सब से ज़यादा मशहूर खबीस इब्लीस यानि शैतान है।

बहिश्ती ज़ेवर १/४२

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

१५ जुमाद अल उखरा १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

कया किसी नबी से गुनाह होता है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

तमाम नबी अलैहिमुससलाम कुफर, शिर्क और झुट वगैरह गुनाह, बुरे काम और बुरी आदतों से पाक होते है।

उन से कोई छोटा या बड़ा गुनाह भूले से या जान बूझ कर नहीं होता।

(इस्लामी अक़ाइद सफा २०)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

१४ जुमाद अल उखरा १४४० हिजरी)

(मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

 

हज़रत मुहम्मद ﷺ के बाद अब दुन्या में नबी कौन  है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

हज़ूर ﷺ तमाम नबीयों में आखरी नबी है। अब हमारे नबी हज़रत मुहम्मद ﷺ के बाद किसी क़िस्म का कोई नबी दुन्या में नहीं आएगा ये हमारा इमान है,  इस बात को मानना ज़रूरी है।

(बहिश्ती ज़ेवर और इस्लामी अक़ाइद)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

१२ जुमाद अल उखरा १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

अल्लाह नबीयों (अलैहिस्सलाम) को क्यूँ भेजते है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

इनसानो को सीधा रास्ता बताने और उसके अहकाम यानि अल्लाह किन चीज़ों से खुश होते है और किन चीज़ों से नाराज़ होते है, ज़िन्दगी का मक़्सद और उसे गुज़ारने का सहीह तरीक़ा क्या है, इस को बतलाने के लिए अल्लाह नबियों-पैगम्बरों (अलैहिस्सलाम) को भेजते है।

(बहिश्ती ज़ेवर और इस्लामी अक़ाइद से माखूज)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

१० जुमाद अल उखरा १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

तकदीर किसे कहते है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

दुन्या में जो कुछ भला बुरा होता है, सब को अल्लाह तआला उस के होने से पहले जानते है,

और अपने जानने के लिहाज़ से उसे पैदा करते है, तक़्दीर ईसी का नाम है।

और बुरी चीज़ के पैदा करने में बहुत से राज़-भेद  है जिन को हर एक नहीं जानता।

बंदे को अल्लाह ने समझ और इरादा दिया है, जिस से वह सवाब और अज़ाब के काम अपने दिल-मर्जी से करता है, मगर बन्दे को किसी काम के पैदा करने की ताक़त नहीं।

गुनाह के काम से अल्लाह तआला नाराज़ और सवाब के काम से खुश होते है।

(बहिश्ती समर)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

०५ जुमाद अल उखरा १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

अल्लाह का कोई हुक्म ऐसा है जो बन्दों के लिए नामुमकिन हो ?

मसलन कोई कहे के निग़ाह की हिफाज़त मुमकिन नहीं, फुला हुक्म इस तरक़्क़ी और फ़िटने के दौर में मुमकिन नही, उस का ऐसा केहना सहीह है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

अल्लाह तआला हकीम-बड़ी अक़्ल और होश्यारी वाला है।

अल्लाह को मालूम है के मेरे बन्दे क्या करे सकते है और किया नहीं कर सकते  है।

लिहाज़ा अल्लाह का कोई भी हुक्म इंसान की ताक़त से बाहर नहीं।

शरीअत पर अमल हर ज़माने में मुमकिन है।

हुक्म देने से पहले अल्लाह तआला के इल्म में क़यामत तक के हालात थे।

लिहाज़ा शरीअत पर अमल हर दौर में मुमकिन है।

(मोईनुल अक़ाइद सफा ५ से  मलहूज़)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

०३ जुमाद अल उखरा १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

आज का सवाल नंबर १६३२

किसी को मुसलमान मान लेने के लिए कितनी बात उस में होना काफी है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

किसी को मुसलमान मान लेने के लिए इतना ही काफी है के वह कलिमा-ए-तैय्यिबह के मज़मून-तौहीद व रिसालत (अल्लाह को एक और हुज़ूर ﷺ  को नबी मान लेने) पर अपने यक़ीन और इक़रार का इज़हार करे।

चाहे वह तमाम दीनी ज़रूरी अक़ाइद से पुरे तौर पर वाक़िफ़ न हो,

मगर उस के साथ यह शरत है के जब उस पर शरई अहकाम-अल्लाह के सब हुक्म एक के बाद दूसरे तफ़सील के साथ पेश होते जाये तो हर एक को दिली रज़ामंदी और ख़ुशी से क़बूल करता रहे, और उस में किसी हुक्म के बारे में शक़ और शुबह ज़ाहिर न करे।

मुइनउल अक़ाइद सफा १९

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

०२ जुमाद अल सानी १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

ज़ाहिरी आमाल को इस्लाम और बातिनी आमाल को इमान कहते है,

तो जो मुस्लिम है उसे मुअ’मीन केह सकते है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

ये फ़र्क़ ज़ाहिरी लुग़वी है, शरीअत की इस्तिलाह-खास ज़ुबान में दोनों अपनी ज़ात के ऐतिबार से एक ही चीज़ है।

लिहाज़ा जिसे मुस्लिम कहते है उसे मुअ’मीन, और जिसे मुअ’मीन कहते उसे मुस्लिम भी केह सकते है।

हां जो ज़रूरियाते दीन के यक़ीन और इक़रार करने के बाद उस अहकामे शरीअत की ज़ाहिर तौर पर अमल और इताअत भी करता हो उसे मुअ’मीने कामिल और मुस्लिमे कामिल कहेंगे।

मुइनउल अक़ाइद सफा १८

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

०१ जुमाद अल उखरा १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

इस्लाम किसे कहते है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

इस्लाम का लुग़वी-डीक्सनरी का मा’ना मानना और सलामती के है,

ओर शरीअत की इस्तिलाः- मख़सूस ज़ुबान में अल्लाह और रसूल के उन अहकाम पर अमल करना जो यक़ीनी ज़रिये से हम तक पहोंचे है।

जाहिरी अमल का नाम इस्लाम और बातिनी-अंदर के यक़ीन का नाम ईमान है।

मुइनुल अक़ाइद सफा १८ से माखूज़

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

३० जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

इमान किसे कहते है?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

इमान को लुग़वी डिक्सनरी में दिल से तस्दीक़ और यक़ीन करना और शरीअत की इस्तिलाह- मख़सूस ज़ुबान में अल्लाह और रसूल के उन अहकाम को दिल से यक़ीन करना और ज़ुबान से इक़रार करना जो यक़ीनी ज़रिये से हम तक पहोंचे है।

मुईनुल अक़ाइद सफा १८

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

२९ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

अक़ाइद-अक़ीदे जानना ज़रूरी है ?

उस का क्या फ़ायदा है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

तमाम दीनी उलूम में अक़ीदे जानने की और उसे दुरुस्त करने की अहमीयत सब से ज़यादा है,

कयूं के तमाम आमाल की क़ुबूलियत का दारोमदार इसी पर मवकूफ है,

इंसान उम्र भर नेकियां करता रहे लेकिन अक़ीदे में नुक़सान होगा तो सारी नेकियां बर्बाद हो जाएगी,

अगर अक़ीदा सहीह हो तो कम से कम हमेशा के अज़ाब से तो नजात मिल जाएगी।

(इस्लामी अक़ाइद सफा १५)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

२८ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

 

कया शैतान को भी मौत वाक़िअ होगी ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

पहले तमाम इनसानों की रूह क़ब्ज़ करेंगे,

फिर मलकुल मौत शैतान की तरफ मुतव्वजेह होंगे,

वो चारों तरफ भागेगा,

फरीश्ते आग के हथोड़ों से उसे वापस लौटायेंगे, और उसकी रूह क़ब्ज़ करेंगे,

ओर उस अकेले मल’ऊन को इतनी तकलीफ होगी जितनी सारे इंसानो को रूह निकलते वक़्त तकलीफ हुई होगी।

(आसारे क़यामत और फित्ना ए दज्जाल सफा: ४४)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

२७ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

आज का सवाल नंबर १६२५

फ़रिश्ते कितने है उन के क्या क्या नाम है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

फ़रिश्तें बेशुमार है, उन की सहीह गिनती अल्लाह ही को मालूम है,

उन में से ४ बड़े मुक़र्रब और मसहूर के नाम और काम ये है।

हज़रत जिब्राईल अलैहिससलाम अल्लाह की किताबेँ अहकाम और पैगाम नबीयों और रसुलों तक पहोंचाते थे।
हज़रत मीकाईल अलैहिससलाम इनके ज़िम्मे बारिस बरसाना और मख्लूक़ तक रोज़ी पहुंचना है।
हज़रत इसराफील अलैहिससलाम इनके ज़िम्मे क़यामत के दिन सूर फूँकना है।
हज़रत इज़राईल अलैहिससलाम  इनके ज़िम्मे मख्लूक़ की जान निकलना मुक़र्रर है।

(इस्लामी अक़ाइद सफा १५)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

२५ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

फरिश्ते क्या करते है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

फरिश्तों के ज़िम्मे बहुत से काम है,

वो अल्लाह के हुक्म के बिलकुल खिलाफ नहीं करते,

अल्लाह जो कहते है वोही करते है,

वो हर वक़्त ज़िक्र तस्बीह और इबादत में लगे रेहते,

वोह कभी थकते नहीं है।

(इस्लामी अक़ाइद सफा १५)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

२४ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

 

 

फ़रिश्ते किसे कहते है?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

अल्लाह तआला ने नूर से एक मख्लूक़ पैदा की है जिन को हमारी नज़रों से छुपा दिया है,

उन को फ़रिश्ते और मलायकह कहते है,

ये न मर्द होते है न औरत।

(इस्लामी अक़ाइद सफा १५)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

२३ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

कयामत किसे कहते है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

एक दिन आएगा के सुरज, चांद, सितारे को अल्लाह त’आला तोड़ देंगे, आसमान और ज़मीन फत जाएंगे, पहाड उड़ादा दिए जाएंगे, और पूरी दुन्या के तमाम  मरे हुवे इंसानो को ज़िन्दा किया जाएगा।

वो दिन बड़ा सख्त और भयानक होगा, लोग अपने अचछे बुरे आमाल के ऐतिबार से राहत और तकलीफ में होंवे,

इस दिन को क़यामत कहा जाता है।

(मुइनउल अक़ाइद सफा १३ से माखूज)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

२० जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

 

 

जब ये दुन्या, सुरज, चांद, आसमान, ज़मीन नहीं थे तो पहले क्या था ?

इंसान कब से है ?

जवाब
حامدا و مصلیا و مسلما

पहले इस दुन्या में न इंसान था, न फ़रिश्तें, न आस्मान, न ज़मीन थी,

सिर्फ एक ज़ात जो हमेशा से थी और हमेशा रहेगी, अपनी तमाम सिफ़त के साथ मव्जूद थी।

फिर उस बे मिसल अल्लाह त’आला ने अपनी चाहत और ईरादे से ज़मीन, आसमान और तमाम मख़लूक़ात और आखीर में आदम अलैहिस्सलाम और उन की अवलाद को पैदा किया।

(मुइनूल अक़ाइद सफा १२)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

१५ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

आदमी सड़ कर या जलकर मिटटी हो जाता है, हड्डी भी चुरा चुरा हो जाती है और इंसान मिटटी में मिल जाता है तो अल्लाह ताला दोबारह कैसे ज़िंदह करेगा?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

मरने के बाद ज़िंदा कैसे होंगे ?: अल्लाह की ज़ात वह है जिस ने इंसान को मिटटी से पैदा किया है, वह इस तरह के इंसान मनी-वीर्य से पैदा होता है, मनी खून से बनती है और खून सब्ज़ी फ़ल या गोश्त से बनता है, जानवर का गोश्त चारे से बनता है, सब्ज़ी और चारा ज़मीन से उगता है,

पता ये चला के इंसान मिटटी से पैदा हुवा है, जिस अल्लाह ने उसे पहली बार मिटटी से पैदा किया उस के मरने के बाद वह मिटटी हो जायेगा, फिर उस को दोबारह मिटटी से पैदा करना क्या मुश्किल है.

(सुरह ताहा आयात ५५ का खुलासा)

ज़मींन बंजर हो जाती है उस पर बारिश होती है तो दरख्त सब्ज़ा-घास उग जाती है, इसी तरह इंसान मिटटी हो जायेगा तो अल्लाह हयात की बारिश बरसायेगा, इंसान भी दरख्त की तरह उग निकलेगा. इस तरह मौत के बाद दोबारह ज़िंदह करेगा

(सुरह  क़ाफ़ आयात ११ का खुलासा. )

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

१४ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

₹उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

⭕आज का सवाल नंबर २५५९⭕

बच्चे की विलादत पर कया -कया करना चाहिए ?

🔵जवाब🔵

बच्चे की विलादत पर सब से पहले उस के दायें कान में अज़ान और बाएं कान में इक़ामत कही जाए।

फिर तहनीक की जाये यानि किसी अल्लाह वाले से खजूर चबवाकर पहले से तैयार रखी जाये, बच्चे को माँ के दूध से भी पहले ये खजूर में से एक चपटी-थोड़ा सा उस के तालु पर लगा दिया जाये, बच्चे पेट में सब से पहले किसी अल्लाह वाले का लुआब- थूक वाली चीज़ जाएगी जिस के नेक असरात बच्चे पर पडेंगे।

फिर सातवे दिन उस का नाम अँबिया अलैहिमुस सलाम, सहाबा रदिय अल्लाहु अन्हुम या अवलिया ए किराम रहमतुल्लाहि अलैहिम के नामों में से कोई नाम रखा जाये।

फिर उस के सर के बाल मुंडवाये जाये और उस बाल के वजन के बराबर सोना या चांदी या उस की क़ीमत सदक़ह की जाये, और दिल चाहे तो उस बच्चे के सर पर ज़ाफ़रान मला जाए।

फिर सातवें दिन अक़ीक़ाह किया जाये या सातवें का खियाल करते हुवे १४ वे दिन या २१वे दिन अक़ीक़ह किया जाये, मसलन बच्चा पीर के दिन पैदाह हुवा है तो ईतवार के दिन अक़ीक़ह करे।

लड़का हो तो दो बकरे या बड़े में दो हिस्से, और लड़की हो तो एक बकरा या बड़े में एक हिस्सा रखे, अक़ीक़ह की बरक़त से बच्चे से आफ़त बला तल जाती है।

अकीकह के जानवर और गोश्त की वही शर्तें और मसाइल है जो क़ुरबानी के जानवर और गोश्त के है।

📗हदयाह ए ख़वातीन और
📘बहिश्ती ज़ेवर से माखूज़।

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नंबर २६२२⭕

ईमान कब दुरुस्त होता है?
सुन्नत का मज़ाक उड़ाने का क्या हुक्म है ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

ईमान तब दुरुस्त होता है जब अल्लाह और रसूल (صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم) को सब बातों में सच्चा समझे और उन सब को मान ले।

अल्लाह और रसूल (صلی اللہ علیہ وآلہ وسلم) की किसी बात में शक करना या उसको झुठलाना या उसमे एब निकालना या उसके साथ मज़ाक़ उड़ाना, इन सब बातो से ईमान जाता रहता है।

📗बहिश्ती ज़ेवर मर्दो के लिये

و الله اعلم بالصواب