aaj ka sawal hindi

कया ज़कात वाजिब होने के लिए हर माल पर साल गुज़रना ज़रूरी है ? दरमियान में माल ज़कात के निसाब से घट गया और दरमियान में नया माल भी आता जाता रहा सब पर ज़कात है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

ज़कात के निसाब पर साल गुज़रना काफी है, हर हर माल पर साल गुज़रना ज़रूरी नहीं, साल पूरा होते ही मवजूदह सब माल मिलकियत की ज़कात दे, चाहे बाज़ माल १ महीना या हफ्ते पहले ही आया हो, तो उस की भी ज़कात दे.

साल के शुरू में और साल के आखिर में ज़कात का निसाब यानी साढ़े बावन टोला चांदी की क़ीमत का मालिक होना काफी है,

दरमियान में माल की मिक़्दार से कम रहा तब भी पुरे निसाब की ज़कात वाजिब होगी।

किताबुल मसाइल जिल्द २ सफा १३३ से माखूज़
बहवला मारकियूल फलाह ३८९
आलमगीरी १/१७५

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
०९शा’बानअलमुअज़्ज़म१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

 

दुकान और जीवन बिमा- लाइफ ईनसूरन्स क़ानूनी मजबूरी में लिया हो तो उस की जमा की हुयी रक़म की ज़कात निकलना ज़रूरी है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

दुकान, कारोबार और कार बिमा की रक़म वापस मिलना यक़ीनी और ज़रूरी नहीं, इसलिए उसपर ज़कात वाजिब नहीं।

अल्बत्ताह जीवन बिमा में हर हाल में रक़म सूद के साथ वापस मिलती है, इसलिए भरी हुयी असल पूरी रक़म मिलने के बाद गुज़रे हुवे तमाम सालों की ज़कात वाजिब होगी (हर साल उस की ज़कात पेशगी-एडवांस निकाल सकते है, ता के एक साथ निकालने का बोज न आये) और जो रक़म जियादह मिलेगी वह हराम और सूद है इसलिए उस पर ज़कात वाजिब नहीं।

(किताबुल मसाइल २/२१७)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
०८शा’बानअलमुअज़्ज़म१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

एक शख्स के पास अपने रहने के अलावा बहुत से मकान है और उन मकानों को किराये पैर देने के लिए ख़रीदा है ताकि उसका रुपया भी महफूज़ रहे ऐसे मकानात पर ज़कात फ़र्ज़ है?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

पूछी हुई सूरत में ज़कात फ़र्ज़ न होगी।

किराये के वह मकानात चाहे कितनी ही क़ीमत के हो उस को किराये पर देने की निय्यत से खरीदा है, अल्बत्ता उनके किराये से हासिल शुदा रक़म निसाब के बा-क़द्र या उससे ज़्यादा जमा हो, और साल भी गुज़र जाये, या दूसरे माल का साल पूरा हो रहा हो तो इन रक़म का भी उस के साथ हिसाब किया जाये, तो इस तरह उसकी ज़कात देना साल पूरा होने से पहले भी ज़कात निकलना ज़रूरी हो जायेगा।

(आप के मसाइल और उनका हल जिल्द -६/१०९)

(फ़िक़हुल इबादात २८१)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
०६शा’बानअलमुअज़्ज़म१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

प्रोविडेंट फंड में जो रक़म मुलाज़िम की तनख्वाह से काटी जाती हे और उस पर माहाना या सालाना इज़ाफ़ा किया जाता हे इस पर ज़कात का क्या हुक्म है?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

ये सब मुलाज़िम की खिदमत का वो मुआवज़ा हे जो अभी उसके क़ब्ज़े में नहीं आया लिहाज़ा वो महकमे-कंपनी के ज़िम्मे मुलाज़िम का क़र्ज़ हे।

ज़कात के मामले में फुक़्हा ए कीराम रह. ने क़र्ज़ की ३ क़िस्मे बयान फ़रमाई हे जिनमे से बाज़ पर ज़कात वाजिब होती हे और बाज़ पर नहीं होती,

वसूल होने के बाद जाब्ते-काइदह के मुताबिक़ ज़कात वाजिब होगी जिसकी तफ्सील ये हे,

मुलाज़िम अगर पहले से साहिबे निसाब नहीं था मगर उस रक़म के मिलने से साहिबे निसाब हो गया तो वसूल होने के वक़्त से एक क़मरी-इस्लामी साल पूरा होने पर ज़कात वाजिब होगी, बा-शर्ते उस वक़्त तक ये शख्स साहिबे निसाब रहे,

अगर साल पूरा होने से पहले माल खर्च होकर इतना कम रह गया क साहिबे निसाब नहीं रहा तो ज़कात वाजिब नहीं होगी।

अगर खर्च या ज़ाया होने के बावजूद साल के आखिर तक माल बा-क़द्रे निसाब बचा रहा तो जितना बाक़ी बच गया सिर्फ उसकी ज़कात वाजिब होगी, जो खर्च हो गया उसकी नहीं होगी।

و الله اعلم بالصواب

(बाक़ी कल इंशा अल्लाह)

(फ़िक़हुल इबादात २७७)

हक़्क़ का दाई अंसार अहमद

तस्दीक़
मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

साहिबे निसाब शख्स को प्रोविडेंट फंड की ज़कात कितने रुपये आये तो निकालनी है ? और कब से निकालनी है ? ये पैसे क़ब्ज़े में आएंगे उस वक़्त से ही उस का शुमार कर सकते है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

अगर ये मुलाज़िम पहले से साहिबे निसाब था तो फंड की रक़म चाहे मिक़्दारे निसाब से कम मिले या ज़्यादा उसका साल अलग से शुमार नहीं होगा, जो माल पहले से उसके पास था जब उसका साल पूरा होगा यानि पहले से मौजूदा निसाब की ज़कात निकालने की तारिख आएगी तो फंड की वसूल शुदा रक़म की ज़कात भी उसी वक़्त वाजिब हो जाएगी, चाहे उस नयी रक़म पर एक दिन ही गुज़रा हो,

ज़कात की ये तफ्सील इमाम ए आज़म अबू हनीफा रह. के कॉल पर हे और फतवा इसी पर है।

साहिबैन रह. के कॉल के मुताबिक़ क़र्ज़ की हर क़िस्म पर ज़कात फ़र्ज़ हे, अगर कोई अहतयात और तक़वे पर अमल करते हुए गुज़िश्ता तमाम सालो की ज़कात अदा करे तो बेहतर हे, उसका बेहतर तरीक़ा ये हे के जबसे ये मुलाज़िम साहिबे निसाब हो उस वक़्त से हर साल के ख़त्म पर हिसाब कर लिया जाये के अब उसके फंड में कितनी रक़म जमा हे, जितनी रक़म जमा हे उसकी ज़कात अदा कर दे, इसी तरह हर साल करता रहे.

फ़िक्हुल इबादात २७७
महमूदुल फतावा २/८२

و الله اعلم بالصواب

हक़्क़ का दाई अंसार अहमद

तस्दीक़ मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

 

सवाल– जकात के लुगवी मानी क्या हैं ? 

जवाब– पाकी, बडोतरी

सवाल– जकात की शरई तारीफ.? 

जवाब– मखसूस माल का मखसूस शराइत के साथ. किसी जकात के मुस्तहिक को मालिक बनाना

सवाल-कितना सोना हो तो जकात फर्ज होती है? 

जवाब– साढे सात तोला या उस से ज्यादा

सवाल-कितनी चांदी हो तो जकात फर्ज होती है ? 

जवाब– साढ़े बावन तोले या उससे अधिक 

सवाल – कितने रुपिये हो तो जकात फर्ज होती है 

जवाब– हाजते असलिया के इलावा साढ़े बावन तोले चांदी की कीमत हो तो जकात फर्ज होती है 

सवाल– हाजते असलिया के इलावा. कुछ सोना. कुछ चांदी. कुछ नगद हो. और सबको मिलाने पर चांदी का निसाब पूरा हो तो क्या जकात फर्ज होगी ? 

जवाब– जी हां

सवाल – क्या चरने वाले जानवरों की जकात फर्ज है ? 

जवाब – जी हां 

सवाल – क्या उशरी (बागायत) जमीन की पैदावार पर भी जकात है ? 

जवाब – जी हां 

सवाल – किसी साहिबे निसाब को दर्मियानी साल 35000 की आमदनी हुई तो क्या ये रकम भी माले निसाब मे शामिल होगी ? 

जवाब – जी हां 

सवाल – इस्तिमाल वाले जेवरात पर जकात है या नही ? 

जवाब – जी हां है

सवाल – जकात अंग्रेजी महीने के हिसाब से निकाली जाये या कमरी (उर्दू)? 

जवाब – कमरी (उर्दू) महीने के हिसाब से 

सवाल – बेचने की निय्यत से करीदे गये प्लॉट पर जकात वाजिब होगी ? 

जवाब – जि हां वाजिब होगी

सवाल – प्लॉट खरीदते वक्त बेचने की निय्यत न थी. बाद मे बेचने का इरादा हुवा तो उस पर जकात वाजिब होगी या नही ? 

जवाब – जब बिक जाये तो वाजिब होगी

सवाल – जो प्लॉट मकान बनाने के लिये खरीदा गया हो उस पर जकात है या नही ? 

जवाब – जी नहीं 

सवाल जो मकान किराया पर दिया उसकी जकात का क्या हुक्म है ? 

जवाब – उसका किराया निसाब को पहूंचे तो उसकी जकात वाजिब होगी

सवाल – किसी को बताये बगैर उसे जकात दें तो जकात अदा होगी या नही ? 

जवाब – अदा हो जायेगी

सवाल– मुलाज़िम ने इजाफी तनखॉह मांगी. मालिक ने जकात की निय्यत से इजाफा किया तो क्या मालिक की जकात अदा होगी ? 

जवाब – जकात अदा न होगी

सवाल – इनकम टॅक्स देने से जकात अदा होगी ? 

जवाब – जी नहीं 

सवाल – क्या अपने मां बाप, बेटा बेटी को या शोहर बीवी एक दुसरे को जकात दे सकते हैं ? 

जकात – जी नहीं 

सवाल – साहीबे निसाब को जकात देने से जकात अदा होगी ? 

जवाब – नहीं 

सवाल – भाई बहन चचा भतीजे मामू भांजे खाला को जकात देना कैसा ? 

जवाब – जाईज व बेहतर

सवाल – किसको जकात नही दे सकते? 

जवाब – हुजूर अलैहिस्सलाम के खानदान (हाशमी हजरात) को जकात नही दे सकते. 

इसी तरह जो हजरते अली, हजरते अक़ील, हजरते जाफर, हजरते अब्बास और हारिस बिन अब्दुल मुत्तलिब की नस्ल से हो उसे जकात नही दे सकते

सवाल – अगर सय्यद (बज़ाहिर) गरीब और जरूरतमंद हो तो उनकी खिदमत कैसे करें? 

जवाब – तोहफे और हदिया के जरीये (सय्यदों को जकात सदका न दें. और कोई सय्यद हरग़िज जकात सदका न लें) 

सवाल – सय्यदों को जकात क्यों नही दी जाती? 

जवाब – वो आली नसब हैं

और जकात माल का मैल होता है

सवाल – मालदार बीवी का शोहर दूसरे से जकात ले सकता है या नही? 

जवाब – ले सकता है 

सवाल – गैर मुस्लिम को जकात दे सकते हैं? 

जवाब – नही

सवाल – दीनी मदरसों मे जकात देना जाइज है या नही? 

जवाब – जाइज व बेहतर है

सवाल – साहिबे निसाब लोग खुद को मोहताज जाहिर करके जकात वसुलते हैं उन पर क्या हुक्म है ? 

जवाब – उनको जकात लेना हराम है

सवाल- बारिश के पानी से सैराब जमीन की पैदावार पर कितना हिस्सा अल्लाह की राह मे देना वाजिब है ? 

इसी तरह खूद सैराब की हुई जमीन की पैदावार पर कितना कितना हिस्सा वाजिब है ? 

जवाब – बारिश के पाणी की पैदावार पर दसवां हिस्सा. और खुद सैराब की गई जमीन की पैदावार पर बीसवां हिस्सा 

सवाल – एक मुल्क की करन्सी से जकात निकाल कर दूसरे मुल्क भेजी जाये तो जकात की अदायगी मे किस मुल्क की करन्सी का एतिबार किया जाये ? 

जवाब – जिष मुल्क से जकात निकाली गई. 

सवाल – हाजते असलिया किसे कहते हैं.? 

जवाब – रिहाइशी मकान, पहनने के कपडे, घर का जरूरी सामान, खाने पीने की अशिया, सवारी, आलिम की किताबें 

सवाल – जकात कब वाजिब होती है.? 

जवाब – निसाब पर क़मरी (उर्दू) साल गुजर जाये तो जकात वाजिब होती है 

सवाल-अगर किसी शख्स का किसी फक़ीर (गरीब) पर कर्ज हो और वो उसे जकात की निय्यत से माफ करदे तो जकात अदा होगी या नही ? 

जवाब – जी नहीं 

सवाल – सोना चांदी की जकात मे सोना चांदी का तुकडा ही देना होगा या उसकी रकम.? 

जवाब – इख्तियार है

सवाल – मसारिफे जकात मे फकीर किसे कहते हैं? 

जवाब – वो शख्स जो निसाब से कम का मालिक हो. 

सवाल – मसारिफे जकात में मिस्कीन किसे कहते हैं? 

जवाब – जो बिल्कुल किसी चीज का मालिक न हो 

सवाल – मसारिफे जकात में आमिल किसे कहते हैं ? 

जवाब – वो शख्स जिसे बादशाहे इस्लाम ने जकात व उश्र वसूलने पर मुक़र्रर किया हो 

सवाल – मसारिफे जकात मे मकरूज किसे कहते है? 

जवाब – जिसके जिम्मे कर्ज हो. कर्ज की अदायगी के बाद निसाबे कामिल का मालिक न रहता हो 

सवाल – मसारिफे जकात मे फी सबीलिल्लाह से क्या मुराद है? 

जवाब – ये वो लोग होते हैं जो अल्लाह की राह मे लगे होते हैं. या वो हुज्जाज जो हज के लिये तो निकले मगर जादे राह के खत्म होने से काबतुल्लाह तक न पहुंच पाये. इसी तरह राहे खुदा के मुजाहिद

सवाल – मुसाफिर पर जकात की कितनी रकम खर्च की जाये ? 

जवाब – इतनी रकम की वो अपने वतन आसानी से पहुंच जाये

सवाल – काफिर को जकात देना जाइज है या नहीं? 

जवाब – जाइज नही

सवाल – मालिके निसाब जकात की रकम अपने असल यानी की बाप दादा (उपर तक) और इसी तरह अपनी फुरूअ यानी बेटा पोता (नीचे तक) पर खर्च कर सकता है या नही ? 

जवाब – नहीं 

सवाल – मस्जिद या मदरसा की तामीर, रासता या पुल की तामीर मे जकात दे सकते हैं या नहीं ? 

जवाब – नहीं दे सकते

सवाल – मैयत को कफनाने या मैयत का कर्ज चुकाने मे जकात की रकम सर्फ करना जाइज है या नहीं ? 

जवाब – जाइज नही

सवाल – जकात की रकम रिश्तेदारों, पडोसियों पर सर्फ करना कैसा ? 

जवाब – जाइज व बेहतर है

सवाल – एक ही शख्स को पूरी जकात देना कैसा ? 

जवाब – मकरूह है

सवाल – जो जमीन तिजारत के लिये ली जाती है क्या उस पर जकात फर्ज है ? 

जवाब – जी हां 

सवाल – गैर मुस्लिम गरीब को जकात दी तो अदा होगी या नहीं ? 

जवाब – अदा न होगी

सवाल – क्या मदरसे के मोहतमिम या नाजिमे आला वगैरा (जो तलबा के वकील होते हैं उन) को जकात दे सकते है ? 

जवाब – हां दे सकते हैं 

सवाल – मुस्तहिके जकात भाई बहन की शादी मे जकात दे सकते हैं ? 

जवाब – हां दे सकते हैं 

सवाल – सोने की जकात खरीदते वक्त की कीमत के हिसाब से होगी या मौजुदा कीमत.? 

जवाब – मौजुदा कीमत के हिसाब से

सवाल – क्या ना बालिग बेटा या बेटी के माल पर भी जकात फर्ज है ? 

जवाब – नहीं 

सवाल – मस्जिद के इमाम या मुअज्ज़िन की तन्खॉह जकात से दी जा सकती है ? 

जवाब – नहीं 

सवाल – क्या लडकी जकात की रकम अपने वालिदैन को दे सकती है ? 

जवाब – नहीं 

सवाल – क्या सय्यद. सय्यद को जकात दे सकते हैं ? 

जवाब – नहीं

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✅ तमाम जवाबात सहीह है.

®मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन साहब.©

उस्तादे दारुल ऊलूम रामपुरा सूरत.