aaj ka sawal hindi

एक औरत को उसके शोहर ने तलाक़ दे दी है, या शोहर का इन्तिक़ाल हो गया हो, तो वह किसी दूसरे शख्स से इद्दत में सिर्फ निकाह करना चाहे तो इद्दत में निकाह होगा या नहीं ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

इद्दत गुजरने से पहले निकाह करने से निकाह सहीह नहीं होगा।

फतावा आलमगीरी १/२८०

हिजरी तारीख़ :
१८ / रबीउल अव्वल १४४१ हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

आज का सवाल नंबर २६४०

किसी ने अपनी बीवी को माँ कहा तो क्या हुक्म है ?
जिहार तो नहीं हुवा ना?

जिहार किसे कहते हैं?
जीस से निकाह पर असर पडता है।

जवाब

حامد ومصلیا و مسلما

अगर किसी ने अपनी बीवी को कहा के :
“तू मेरी माँ के बराबर है” या
“तू मेरी माँ जैसी है” या
“तुम तो मेरी माँ हो”.
मक़सद इस से बीवी की बुजुर्गी और इज़्ज़त करना हो,
या इस निय्यत से कहा हो के तू उम्र में मेरी माँ के बराबर है, तो निकाह पर कोई असर नहीं पड़ा।

या ऐसे ही बक दिया, कोई निय्यत नहीं की तो भी कुछ भी नहीं हुवा।

अगर इस निय्यत से कहा के
“तू मुझ पर मेरी माँ की तरह हराम है” या
“इस से तलाक़ देने या छोड़ने की निय्यत हो”
तो तलाक़े बाईंन पड़ जाएगी।
याने एक तलाक़ पड़ कर निकाह ख़त्म हो जाएगा।

या उस केहने से निय्यत हो के
“में तुझे तलाक़ तो नहीं देता, मगर तू रोटी कपडा ले और यहाँ पड़ी रेह, में तुझसे सोहबत नहीं करुँगा”
तो इस से भी तलाक़े बाईंन पड़ेगी।

दरसी बहिश्ती ज़ेवर सफा ३९२

و الله اعلم بالصواب

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

आज का सवाल नंबर २६४१

कल ज़िहार की ता’रीफ़ बतायी थी उसका हुक्म क्या है ?
कया बीवी से दोबारह निकाह करना पडेगा ?

जवाब

حامد ومصلیا و مسلما

जिहार करने (माँ की तरह अपने पर हराम करने) से बीवी निकाह से तो नहीं निकलेगी,
मगर बीवी से सोहबत करना, बोसा देना, शहवत से हाथ लगाना यह सब हराम हो जाएगा।

जब तक के उसका कफ़्फ़ाराह अदा न करे, चाहे ईसी हालत में कितने ही साल निकल जाऍं।

हां, जब कफ़्फ़ाराह अदा कर देगा तो उसके बाद दोनों मिया बीवी की तरह रह सकते हैं, नया निकाह पढने की ज़रुरत नहीं।

उसका कफ़्फ़ाराह वही है जो रोज़ह तोड़ने का कफ़्फ़ाराह है।

बहिश्ती ज़ेवर सफा ३९३

و الله اعلم بالصواب

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

AAJ KA SAWAL NO., २६७१

.ईसलाममें तलाक देनेका ईखतयार सिफँ मदोँ को है. औरतो को कयुं नही़ं ?

🔵Jawab🔵

1. मदँको औरत पर अल्लाह चलाने एक क़िस्मकी बरोतरी दी हे. कलिंज के शादी के बाद औरत का महर, वलिमे का खचँ, ओर बीवी बचचौके खाने-पीने, कपडे व मकान वग़ैरह का खचँ, ईसलाममें मदँके जिम्मे रखा है. अगरचे औरत मालदार हो ओर कमाती हो, ओर अपना खचँ खुदभी ऊठानेके काबील हो तो भी खर्च की जिम्मेदारी मदँसे माफ नही होती है. ओर अक्सर औरतौं के मुकाबले मै ईनतेजामी सलाहियत, अक़ल समझदारी, गुस्से पर कनटो्ल ? कुववते बरदासत, रंज व गम से जल्दी मुताससीर न होना, ये तमाम सिफ़त अक्सर मदौँमैं ज्यादा होती हैं. लिहाज़ा अक्सर मदँ तलाक अक्सर औरतों के मुकाबले में सोच समझ कर देगा, कयों की उसे मालूम है के तलाक के बाद भी बीवी का ईद़त तक का खचँ और बचचौं का बालिग व शादी होने तक का खचँ और बीवीको परवरिश और देखभाल का खचँ, दुसरी शादी के महर वलीमे का खचँ, मदँ के जिम्मे है, ऐसा कोई खचँ औरत के जिम्मे नही है. लिहाज़ा ये सब खचँ ऊसके जिम्मे तलाकके बाद दोबारा आईगे, इसलिये मदँ सोच समझ कर तलाक देगा. औरत के जिम्मे दुसरी शादी के बाद भी किसी किसम का खचँ उसके जिम्मे नही आयेगा. बल्कि दूसरी शादी की वजह से महर और कपडे वग़ैरह दूसरे शोहर से मिलेगा. लिहाज़ा वह तलाक देनेकी ज्यादा जरुरत करेगी. और अक्सर औरतें जल्दबाज, जजबाती, रंज व गम से जल्दी मुतासीर होने वाली, कम समझ होती हैं . अगर तलाक का ईखतयार उसे दीया जावे तो जितनी तलाक मदँ वाकया करता है उससे दुगनी औरतैं वाकया करती. मदँ तलाक देने का ईखतयार औरतकोभी दे सकता है, जिसे तफवीज़ कहते हैं. जब मदँ औरत कोतलाक देने का ईखतयार देगा तो औरतभी अपने आप पर तलाक वाकया कर सकती हैं, एक दौर अरब में ऐसाभी गूजरा है कि औरत शादी होते ही तफवीज़ के जरीये तलाक का ईखतयार शौहरसे अपने नाम पर लीखवा लाया करती थी. उस जमानेमे औरतैं मामुली झगड़े में भी तलाक अपने आप को देने के वाकयात बहुत ज्यादा हुए थे. लिहाज़ा तजुरबा व अकल ईस बातको मान लेती है कि असल तलाक देने का ईखतयार मदौँको ही होना चाहिए. नोट :- हर सो (100) मे से एक दो औरतें ऐसी भी होती हैं जो मदौँ से ज्यादा अक्लमंद, गुस्से पर काबू रखने वाली वगैरह शिफ़त में मदौँसे आगे होती है, और बाज़ मदँ औरतौंसे ज्यादा नासमझ, जलदबाझ वग़ैरह कमजोरी रखनेवाला होते हैं. लिहाज़ा शरीयतके हुक्मका दारोमदार अक्सर लोगौं के ऐतबार से होता है, बाज़ लोगोके ऐतबारसे नहीं होता.

📕तनाजउत का शरई हाल और शौहर को हक़ ए तलाक कयुं? सफा 21 से 23 का खुलासा

📝 Mufti Imran Ismail Memon.

⭕आज का सवाल नंबर २७४५⭕

बीवी शोहर से कई सालों से दूर अपने माँ बाप के घर है तो क्या खुद ब खुद तलाक़ हो जाती है?


🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

बीवी शोहर से चाहे जितने भी साल दूर रहे जब तक शोहर तलाक़ न दे खुद ब खुद तलाक़ होती नहीं है।

हाँ अगर शोहर क़सम खाए के ४ महीने तक तेरे क़रीब नहीं आऊंगा, और फिर उस क़सम को पूरी करे तो उस से एक तलाक़े बाईंन यानि निकाह ख़त्म हो जाता है।

ऐसी क़सम के बगैर चंद साल से ताल्लुक़ न होने से भी निकाह बाक़ी रहता है।

📗शरहे विकाया से माखूज़।

و الله اعلم بالصواب

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.