पतंग की डोर से बचने के लिए बाइक पर हिफ़ाज़ती तार लगने का हुक्म १६०६

अभी पतंग के तेहवार का ज़माना चल रहा है,

बहुत से बाइक वालों के गले या चेहरे से पतंग की धारदार ड़ोर टकराती है और गला कट कर आदमी मर जाता है, या गला या चेहरा ज़ख़्मी हो जाता है।

तो अपनी सेफ्टी के लिए बाइक पर अगले हिस्से में  हिफ़ाज़ती तार लगाना अल्लाह पर तवक्कुल और तक़्दीर  पर भरोसे के खिलाफ है या नहीं ?

कया हिफ़ाज़ती तार लगा सकते है?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

तवक्कुल और तक़्दीर पर यक़ीन का मा’ना ये है के अस्बाब इख़्तियार करो,

फिर भरोसा अस्बाब पर न हो, बल्के अल्लाह की ज़ात पर हो,

हज़ूर ﷺ  ने फ़रमाया : ऊंट को नकील से बांधो, फिर उस की हिफाज़त के लिए तवक्कुल अल्लाह पर करो।

हिफ़ाज़ती तार भी अपनी जान और जिस्म की हिफाज़त के अस्बाब के दर्जे में है, लिहाज़ा उसे लगाना तवक्कुल और तक़्दीर पर एतिमाद के खिलाफ नहीं।

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

०५ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)