aaj ka sawal hindi

कीसी का इन्तिक़ाल हो जाये तो घरवालों को कितने दिन सोग मनाना जाइज़ है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

मरहूम की बेवा के अलावा दूसरे घरवालों और रिशतेदारों को ३ दिन से ज़यादा सोग मनाना जाइज़ नहीं।

(लिहाज़ा आजकल जो लोग ३ दिन बाद भी तय शुदा निकाह नहीं करते या निकाह, ईद वगैरह ख़ुशी के जाइज़ मोके पर नहीं जाते ये सहीह नहीं।)

(जदीद मुआमलात के शरई अहकाम ३/२५३)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

१८ रबी उल आखर १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

 

‘औरत का मर्द की इजाज़त‘ के साथ ही जाना कैसा है ? इजाज़त ज़रूरी है?

और मर्द को औरत को इजाज़त देना कब जाइज़ है ?

जवाब:  حامدا و مصلیا و مسلما

“औरत का मर्द की इजाज़त” और शरई परदे के साथ जाना फर्ज़े ऍन और ज़रूरी है.

ये इजाज़त चाहे सराहतन -साफ़ साफ हो या दलालतन यानि औरत को ये यक़ीन या ग़ालिब गुमान हो के ये ज़रूरी काम है, इसलिए मेरे मर्द को पुछे बगैर निकलने का पता चलेगा तो मर्द नाराज़ न होगा या में इस काम के लिए अगर इजाज़त मागूँगी तो मनानहीं करेगा, तो ये इजाज़त समझि जाएगी।

मर्द गैर शरई और गैर ज़रूरी काम के लिए औरत को घर से बाहर निकलने इजाज़त देगा तो गुनेहगार होगा।

उम्दतुल फ़िक़ह १/१०६

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़: २१ सफर उल मुज़फ्फर १४४० हिजरी

“औरत का मर्द की इजाज़त“: मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

⭕आज का सवाल नंबर २५९१⭕

ओरत टीचिंग कर सकती है?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

पढ़ने वाली औरतें, या छोटे बच्चे हो तो तालीम दे सकती है।

अगर बड़े लड़के हो तो परदे के शराइत का लिहाज़ करते हुवे फ़ितने का अंदेशा न हो तो गुंजाईश है।

बाशर्त के तालीम जाइज़ उमूर-कामों की होनी चाहिये।

📕महमूदुल फ़तावा ८/२८

و الله اعلم بالصواب

⭕आज का सवाल नंबर -२५९०⭕

बीवी के लिए चाचा ख़ुसर (ससुर के भाई) से और शोहर के मामु (सास के भाई) से परदह है?

बा’ज़ लोग कहते हैं के तक़वे की रो से है फ़तवे के रो से नहि।
सहीह क्या है?


🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

चाचा ख़ुसर और शोहर का मामु महरम में से नहि, लिहाज़ा और कोई हुरमत (महरम होने) का रिश्ता न हो तो उस से परदह है।

📕महमूदुल फ़तवा ६/२८

و الله اعلم بالصواب

⭕आज का सवाल नंबर २५९९⭕

मेरी बीवी के दांतों पर काले दाग हो गए है, जो दिखने में ख़राब लगते है।
तो क्या उस की सफाई, फ़िर उस पर खोल चढाना गैर महरम मर्द डॉक्टर के पास करवा सकते है ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

ये इलाज ज़ीनत (सजावट, श्रृंगार) के वास्ते है, जो गैर महरम के पास कराना जाइज़ नहीं।

📚महमूदुल फ़तावा ८/२७

و الله اعلم بالصواب

⭕आज का सवाल नंबर २६०६⭕

एक आदमी अपनी हयाती ही में अपना माल और जायदाद तक़सीम करना चाहता है,
ये मरने से पहले हदया होने की वजह से लड़का लड़की को बराबर बराबर देना चाहता है, और बीवी को कुछ भी देने का इरादह नहीं तो क्या हुक्म है ?


🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

बख्शीश और हदया में लड़का लड़की को बराबर देना तो सहीह है।
लकिन बीवी को महरूम करना मक़सद हो तो गुनेहगार है।

📗महमूदुल फ़तावा ८ /३५६

و الله اعلم بالصواب

⭕आज का सवाल नंबर – २६१३⭕

मदँ और औरत जब पाक है तो उनकी शमँगाह का जाहिरी हीस्सा पाक है या नापाक?                                 
अगर हमबिस्तरी के दौरान मदँ औरत को अपनी शमँगाह मुँह मे देवे, या चाटे ,या चटवाये उसकी शमँगाह चुमे तो जाईज है या नहीं?
ऐसे मसाइल पूछने में शमँ महसूस होती है लेकिन जरुरतन दरीयाफत किया है   माफ   फरमाईयें  ।         

  🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما
     
हजरत सैयद मुफती अबदुरँरहिम लाजपुरी रहमतुललाहअलैयही तहरीर फरमाते है की,  दिन  के मसाईल और अहकाम दरियाफत करने मे शमँ व हया को आड़ न बनाना चाहिए. अगर शमँ व हया का लिहाज कर के दिनी अहकाम की मालूमात ना की जाऐ तो शरई अहकाम का ईलम कैसे होगा?   
कुरआन मे है, “अल्लाह तआला हक बात कहने मे किसी का लिहाज नहीं करते”
बेशक़  शमँगाह का जाहीरी हिस्सा पाक है लेकिन ये जरुरी नहीं की हर पाक चीज़ को मुँह लगाया जाये, और मुँह मे लिया जावे, उसको चुमा जाए ओर चाटा जाए ….
नाक की रुतुबात , नीक,सेंड पाक है तो क्या नाक के अंदरुनी हिस्से को जबान लगाना ओर उसके रुतुबात को मुंह मे लैना पसंदीदा आदत हो सकती है? ओर उसकी ईजाजत हो सकती है?
पाखाना की जगह का जाहिरी हिस्सा भी नापाक नहीं. पाक है तो क्या उसको भी चुमने चाटना की ईजाजत  होगी? !!!!!
नहीं  हरगिज़ नहीं…… 
ईसी तरह मदँ की अपनी शमँगाह औरत के मुँह मे देना जाईज नहीं. शख्त मकरुह व गुनाह है………     
जिस मुंह से वह अल्लाह का नाम लेती है ‘क़ुरआन पढ़ती है, हुजुर सल्ललाहु अलयही व सल्लम पर दुरुद शरीफ पढ़ती हे ऊस मुंह मे नापाकी देने को कैसे गवारा किया जा सकता है?  असतगफिरुललाह………..             
शायर कहता हैं.
(फारसी शेर का तजुँमा)                                           
हजार बार घौऐ अपने मुंह को मुश्क व गुलाब से़.                                
फीरभी तेरा नाम लैना बहुत ही बेअदबी है.                                    

ये गैर कौमौ का कलचर है । ओर प्रिंट ओर ईलेकटोनीक मीडिया की गलत इस्तेमाल की नहूसत है. जो इस्लामी मिजाज़ के बिलकुल खिलाफ़ है. शमँगाह चुमना कुतौं / बकरो वगैरह हैवानीयत की खसलत के मुसाबह कॉपी है. ओर  मुंह मे देना तो अैसी बुरी चीज़ है की नर जानवर भी अपनी माँदाओ के साथ ऐसा नहीं करते….                    
ये तो उस सुरत मे जब मदँ की शमँगाह की सख्ती पैदा ना हुई हो … ओर सख्ती पैदा हो गई हो फिर बीवी की मुँह मे शमँगाह दी जाये तो मज़ी ( मनी से पहले निकलने वाला पानी) का निकलना यकीनी है. और मज़ी गलीज़ नजासत ओर सखत नापाक है. 
नापाकी को मुँह मे देना और लेना हराम हे.  ओर आज कल की गैरौं की तहज़ीब की नक़ल कर के मुखमैथुन करना यानी मुंह मे मनी खारिज करना सख्त हराम ओर ईऩ्तेहाई घीनौवनी हरकत है ।

📗 फतावा रहीमीयह जीलद 10/178 ब हवाला  आलमारी हजफौ ईजाफे के साथ.
                                          
📕जामिया बिनौरीया आजमाया.  कराची.  सीरियल नं.  9868.              
 अल्लाह तआला पूरी उम्मतकी  गैरौंकी तहज़ीब और मीडिया के गलत इस्तेमाल से पुरी हिफाज़त फरमाए …… आमीन..

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का  सवाल  नंबर ~२६१४ ⭕

बीवी  का  पिस्तान  मुंह  में  ले  सकते  है ?
अगर  कोई  बीवी  का  दूध  पी ले   तो  क्या  बीवी  हराम  हो  जायेगी ?

🔵जवाब🔵

हाँ  बीवी  का  पिस्तान मुंह  में  ले  सकते  है,

और  दूध  अगर  मुंह  में  आ  जाये  तो  उसे  फ़ौरन  थूक  दे, अगर  कोई  पी  गया  तो  बीवी हराम  तो  नहीं होगी और  ना  निकाह  पर  कोई  असर  पड़ा, लेकिन  उसने  ये  गन्दा  और  गुनाह  का  काम  किया,

👉आइन्दाह ऐसी  हरकत  ना करने  का  अहद  करे, और  इस  से  तौबा   करे.

📗फतावा कास्मिया  २२ /५१

و الله اعلم بالصواب

⭕आज का सवाल नंबर २६१६⭕

हालाते हैज़ में या वेसे ही बीवी से आगे के बजाये पीछे के रास्ते से सुहबत की,
तो कया इस से निकाह टूट जाता है?
अगर ऐसा कर लिया तो इस की तलाफ़ी की क्या सुरत है?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا و مسلما

इस गैर इंसानी हरकत से निकाह नहीं टूटेगा, अगरचे ये इन्तिहाई बुरा और सख्त तरीन कबीरा गुनाह है

इस से सचचे दिल से तौबा और इस्तिगफार करना ज़रूरी है, और तौबा की निय्यत से कुछ सदक़ह भी कर दे।

📗किताबुननवाज़िल ८/५५५

و الله اعلم بالصواب