नज़र (मन्नत) के रोज़े में दिन की तायीन | १७७६

कीसी ने मन्नत मानी के मेरा फुलां काम हो जायेगा तो जुमा को रोज़ा रखूँगा, या यूं निय्यत की के कल रोज़ा रखूँगा, या तारिख और महीना तय की के मुहर्रम की पेहली तारिख को रोज़ा रखूँगा।

तो क्या जो दिन तय किया है उसी दिन रोज़ा रखना नज़र (मन्नत) के रोज़े में दिन की तायीन ज़रूरी है ?

जवाब
حامدا و مصلیا مسلما

जो दिन तय किया उसी दिन रोज़ा रखना ज़रूरी नहीं।
जुमा की जगाह किसी और दिन कल के बजाये परसु या जब चाहे।

मुहर्रम के बजाये किसी भी महीने में किसी भी तारिख को रोज़ा रख सकता है।

दरसी बहिश्ती ज़ेवर ४०८

शबे बरात के कब और कितने रोज़े रखे? १७०२

शबे बारात के कितने रोज़े रखने है और कब?
और इस रात की इबादत कब और कौन से दिन करनी है?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

शाबान के महीने में हुज़ूर صل اللہ علیہ وسلم कसरत से रोज़े रखते थे, जब पूछा गया तो फ़रमाया, इस रात में वफ़ात के फैसले होते है, जब मेरा फैसला हो तो में पसंद करता हूँ के उस वक़्त में रोज़े से हूँ.
(अल हदीस)

वैसे हर महीने में १३,१४,१५ के रोज़े जिसे ”अय्यामे बीज “कहते सुन्नत है, लिहाज़ा चाहो तो इस महीने में कसरत से रोज़े रखो, ये दिन रख लो या शबे बारात के दूसरे दिन एक रोज़ा रख लो.

इंडिया में २० अप्रैल २०१९ सनीचर के दिन मगरिब बाद से सुबह सादिक़ तक पूरी रात या अक्सर रात या जिस क़दर हिम्मत हो इबादत करनी है, और इतवार के दिन २१ अप्रैल २०१९ को एक रोज़ा रखना भी काफी है, दो रोज़े रखने का हुक्म आशूरह की तरह इस महीने में नहीं है. और १५ शाबान ही के रोज़े को सुन्नत न समझे।

*मदाइल ए शबे बरात व शबे क़द्र और अल ब्लाग माहनामा से माखूज़.

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
१४~शा’बान~अल~मुअज़्ज़म~१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

 

ज़कात के आसान मसाइल

 

ज़कात के आसान मसाइल

 

सवाल– जकात के लुगवी मानी क्या हैं ? 

जवाब– पाकी, बडोतरी

सवाल– जकात की शरई तारीफ.? 

जवाब– मखसूस माल का मखसूस शराइत के साथ. किसी जकात के मुस्तहिक को मालिक बनाना

सवाल-कितना सोना हो तो जकात फर्ज होती है? 

जवाब– साढे सात तोला या उस से ज्यादा

सवाल-कितनी चांदी हो तो जकात फर्ज होती है ? 

जवाब– साढ़े बावन तोले या उससे अधिक 

सवाल – कितने रुपिये हो तो जकात फर्ज होती है 

जवाब– हाजते असलिया के इलावा साढ़े बावन तोले चांदी की कीमत हो तो जकात फर्ज होती है 

सवाल– हाजते असलिया के इलावा. कुछ सोना. कुछ चांदी. कुछ नगद हो. और सबको मिलाने पर चांदी का निसाब पूरा हो तो क्या जकात फर्ज होगी ? 

जवाब– जी हां

सवाल – क्या चरने वाले जानवरों की जकात फर्ज है ? 

जवाब – जी हां 

सवाल – क्या उशरी (बागायत) जमीन की पैदावार पर भी जकात है ? 

जवाब – जी हां 

सवाल – किसी साहिबे निसाब को दर्मियानी साल 35000 की आमदनी हुई तो क्या ये रकम भी माले निसाब मे शामिल होगी ? 

जवाब – जी हां 

सवाल – इस्तिमाल वाले जेवरात पर जकात है या नही ? 

जवाब – जी हां है

सवाल – जकात अंग्रेजी महीने के हिसाब से निकाली जाये या कमरी (उर्दू)? 

जवाब – कमरी (उर्दू) महीने के हिसाब से 

सवाल – बेचने की निय्यत से करीदे गये प्लॉट पर जकात वाजिब होगी ? 

जवाब – जि हां वाजिब होगी

सवाल – प्लॉट खरीदते वक्त बेचने की निय्यत न थी. बाद मे बेचने का इरादा हुवा तो उस पर जकात वाजिब होगी या नही ? 

जवाब – जब बिक जाये तो वाजिब होगी

सवाल – जो प्लॉट मकान बनाने के लिये खरीदा गया हो उस पर जकात है या नही ? 

जवाब – जी नहीं 

सवाल जो मकान किराया पर दिया उसकी जकात का क्या हुक्म है ? 

जवाब – उसका किराया निसाब को पहूंचे तो उसकी जकात वाजिब होगी

सवाल – किसी को बताये बगैर उसे जकात दें तो जकात अदा होगी या नही ? 

जवाब – अदा हो जायेगी

सवाल– मुलाज़िम ने इजाफी तनखॉह मांगी. मालिक ने जकात की निय्यत से इजाफा किया तो क्या मालिक की जकात अदा होगी ? 

जवाब – जकात अदा न होगी

सवाल – इनकम टॅक्स देने से जकात अदा होगी ? 

जवाब – जी नहीं 

सवाल – क्या अपने मां बाप, बेटा बेटी को या शोहर बीवी एक दुसरे को जकात दे सकते हैं ? 

जकात – जी नहीं 

सवाल – साहीबे निसाब को जकात देने से जकात अदा होगी ? 

जवाब – नहीं 

सवाल – भाई बहन चचा भतीजे मामू भांजे खाला को जकात देना कैसा ? 

जवाब – जाईज व बेहतर

सवाल – किसको जकात नही दे सकते? 

जवाब – हुजूर अलैहिस्सलाम के खानदान (हाशमी हजरात) को जकात नही दे सकते. 

इसी तरह जो हजरते अली, हजरते अक़ील, हजरते जाफर, हजरते अब्बास और हारिस बिन अब्दुल मुत्तलिब की नस्ल से हो उसे जकात नही दे सकते

सवाल – अगर सय्यद (बज़ाहिर) गरीब और जरूरतमंद हो तो उनकी खिदमत कैसे करें? 

जवाब – तोहफे और हदिया के जरीये (सय्यदों को जकात सदका न दें. और कोई सय्यद हरग़िज जकात सदका न लें) 

सवाल – सय्यदों को जकात क्यों नही दी जाती? 

जवाब – वो आली नसब हैं

और जकात माल का मैल होता है

सवाल – मालदार बीवी का शोहर दूसरे से जकात ले सकता है या नही? 

जवाब – ले सकता है 

सवाल – गैर मुस्लिम को जकात दे सकते हैं? 

जवाब – नही

सवाल – दीनी मदरसों मे जकात देना जाइज है या नही? 

जवाब – जाइज व बेहतर है

सवाल – साहिबे निसाब लोग खुद को मोहताज जाहिर करके जकात वसुलते हैं उन पर क्या हुक्म है ? 

जवाब – उनको जकात लेना हराम है

सवाल- बारिश के पानी से सैराब जमीन की पैदावार पर कितना हिस्सा अल्लाह की राह मे देना वाजिब है ? 

इसी तरह खूद सैराब की हुई जमीन की पैदावार पर कितना कितना हिस्सा वाजिब है ? 

जवाब – बारिश के पाणी की पैदावार पर दसवां हिस्सा. और खुद सैराब की गई जमीन की पैदावार पर बीसवां हिस्सा 

सवाल – एक मुल्क की करन्सी से जकात निकाल कर दूसरे मुल्क भेजी जाये तो जकात की अदायगी मे किस मुल्क की करन्सी का एतिबार किया जाये ? 

जवाब – जिष मुल्क से जकात निकाली गई. 

सवाल – हाजते असलिया किसे कहते हैं.? 

जवाब – रिहाइशी मकान, पहनने के कपडे, घर का जरूरी सामान, खाने पीने की अशिया, सवारी, आलिम की किताबें 

सवाल – जकात कब वाजिब होती है.? 

जवाब – निसाब पर क़मरी (उर्दू) साल गुजर जाये तो जकात वाजिब होती है 

सवाल-अगर किसी शख्स का किसी फक़ीर (गरीब) पर कर्ज हो और वो उसे जकात की निय्यत से माफ करदे तो जकात अदा होगी या नही ? 

जवाब – जी नहीं 

सवाल – सोना चांदी की जकात मे सोना चांदी का तुकडा ही देना होगा या उसकी रकम.? 

जवाब – इख्तियार है

सवाल – मसारिफे जकात मे फकीर किसे कहते हैं? 

जवाब – वो शख्स जो निसाब से कम का मालिक हो. 

सवाल – मसारिफे जकात में मिस्कीन किसे कहते हैं? 

जवाब – जो बिल्कुल किसी चीज का मालिक न हो 

सवाल – मसारिफे जकात में आमिल किसे कहते हैं ? 

जवाब – वो शख्स जिसे बादशाहे इस्लाम ने जकात व उश्र वसूलने पर मुक़र्रर किया हो 

सवाल – मसारिफे जकात मे मकरूज किसे कहते है? 

जवाब – जिसके जिम्मे कर्ज हो. कर्ज की अदायगी के बाद निसाबे कामिल का मालिक न रहता हो 

सवाल – मसारिफे जकात मे फी सबीलिल्लाह से क्या मुराद है? 

जवाब – ये वो लोग होते हैं जो अल्लाह की राह मे लगे होते हैं. या वो हुज्जाज जो हज के लिये तो निकले मगर जादे राह के खत्म होने से काबतुल्लाह तक न पहुंच पाये. इसी तरह राहे खुदा के मुजाहिद

सवाल – मुसाफिर पर जकात की कितनी रकम खर्च की जाये ? 

जवाब – इतनी रकम की वो अपने वतन आसानी से पहुंच जाये

सवाल – काफिर को जकात देना जाइज है या नहीं? 

जवाब – जाइज नही

सवाल – मालिके निसाब जकात की रकम अपने असल यानी की बाप दादा (उपर तक) और इसी तरह अपनी फुरूअ यानी बेटा पोता (नीचे तक) पर खर्च कर सकता है या नही ? 

जवाब – नहीं 

सवाल – मस्जिद या मदरसा की तामीर, रासता या पुल की तामीर मे जकात दे सकते हैं या नहीं ? 

जवाब – नहीं दे सकते

सवाल – मैयत को कफनाने या मैयत का कर्ज चुकाने मे जकात की रकम सर्फ करना जाइज है या नहीं ? 

जवाब – जाइज नही

सवाल – जकात की रकम रिश्तेदारों, पडोसियों पर सर्फ करना कैसा ? 

जवाब – जाइज व बेहतर है

सवाल – एक ही शख्स को पूरी जकात देना कैसा ? 

जवाब – मकरूह है

सवाल – जो जमीन तिजारत के लिये ली जाती है क्या उस पर जकात फर्ज है ? 

जवाब – जी हां 

सवाल – गैर मुस्लिम गरीब को जकात दी तो अदा होगी या नहीं ? 

जवाब – अदा न होगी

सवाल – क्या मदरसे के मोहतमिम या नाजिमे आला वगैरा (जो तलबा के वकील होते हैं उन) को जकात दे सकते है ? 

जवाब – हां दे सकते हैं 

सवाल – मुस्तहिके जकात भाई बहन की शादी मे जकात दे सकते हैं ? 

जवाब – हां दे सकते हैं 

सवाल – सोने की जकात खरीदते वक्त की कीमत के हिसाब से होगी या मौजुदा कीमत.? 

जवाब – मौजुदा कीमत के हिसाब से

सवाल – क्या ना बालिग बेटा या बेटी के माल पर भी जकात फर्ज है ? 

जवाब – नहीं 

सवाल – मस्जिद के इमाम या मुअज्ज़िन की तन्खॉह जकात से दी जा सकती है ? 

जवाब – नहीं 

सवाल – क्या लडकी जकात की रकम अपने वालिदैन को दे सकती है ? 

जवाब – नहीं 

सवाल – क्या सय्यद. सय्यद को जकात दे सकते हैं ? 

जवाब – नहीं

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✅ तमाम जवाबात सहीह है.

®मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन साहब.©

उस्तादे दारुल ऊलूम रामपुरा सूरत.

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