aaj ka sawal hindi

वजन करके जानवर को खरीदने कैसा है ?
इसमें धोखा नहीं होता है क्यों क्यूंकि वज़न से क़ीमत का इत्मिनान हो जाता है।

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

जानवर तोल के तोले जाने वाली चीज़ों में दाखिल नहीं है, इस लिए हिदायह और फत्हुल क़दीर आलमगीरी वगैरह में इस मुआमले को नाजायज लिखा है।

नाजायज होने की वजह यह है कि मामले से पहले ना जानवर का वज़न मालूम होता है, ना उसकी कीमत मालूम होती है, तो यह मुआमला मजहूल- नामालूम हो गया, लेकिन जब जानवर को तोल लिया जाए उस वक़्त उसका वज़न और और कीमत मालूम होकर जहालत ख़त्म हो जाती है।

रही बात वज़न से जानवर का मुकम्मल गोश्त मालूम नहीं होता है, जानवर सुकड़कर कर या साँस फुला कर घटा बढ़ा देता है तो यह थोड़ी सी जहालत माफ़ है, उर्फ़ यानी बाजार का ऐसा रिवाज जिस में खरीदार और और बेचने वाला दोनों राज़ी है लिहाजा यह मामला आख़िरकार सहीह हो जायेगा।

दारुल दारुल उलूम देओबंद के जैसे नाजायज होने का फतवा है वैसे ही ऊपर दी गई तफ़सील के साथ जवाज़ का भी फ़तवा मौजुद है, उस पर भी अमल की गुंजाईश है, लेकिन क़ुरबानी एक इबादत है, जिस को सहीह तरीक़े से अदा करना ही तक़वा है, जो उस का मक़सूद है, लिहाज़ा जब तक हो सके इस इख़्तिलाफ़ी तरीके से बचना चाहिए और एहतियात का पहलु इख़्तियार करना चाहिए।

जाइज़ के कहनेवाले
१। अहसनुल फ़तवा
२। किताबुंन नवाज़िल
३। देवबन्द के दूसरा फ़तवा

नाजाइज़ कहनेवाले
१। फतावा रहीमियह १०/४८
२। देवबन्द का पहला फ़तवा
३। हिदयाह फत्हुल क़दीर

و الله اعلم بالصواب

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा व सेक्रेटरी जमीयते उलमा सूरत शहर, गुजरात, इंडिया

 

दूध से मलाई निकालने के बाद दूध को अलग से बेचना कैसा है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

दूध ख़ुदा ए पाक की उम्दह नेअमत है, खालिस दूध में जो लज़्ज़त है वह उस में नहीं रेहती जिस में से मलाई निकाल ली जाये।

लिहाज़ा उस को इस तरह बिगाड कर बेचना मख़लूक़े ख़ुदा को ख़ालिस चीज़ से महरूम करने और नेअमत की नाशुक्री के बराबर है।

हां, अगर बतला दे और उस वजह से क़ीमत भी कम कर दे और धोका न दे तो जाइज़ है।

फ़तवा रहीमीयह करांची ९/२१४

و الله اعلم بالصواب

हिजरी तारीख़ : १७ / रबीउल आखर १४४१ हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा व सेक्रेटरी जमीयते उलमा सूरत शहर, गुजरात, इंडिया

अंडा ख़रीदने के बाद तोडा तो वह गन्दा निकला, तो वापस देकर पैसे लेना कैसा है ?

जवाब

حامدا و مصلیا مسلما

जाइज़ है।
ये अंडा किसी काम का नहीं था, तो इसे बेचना बातिल (हराम) हुवा।
लिहाज़ा जो क़ीमत दी थी वह वापस ले सकता है।

हिदायाह आखिरन बाबू बाईल फ़ासिद सफा २७
फतावा रहीमियह करांची ९/२०९

हिजरी तारीख़ : १६ / रबीउल आखर ~ १४४१ हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा व सेक्रेटरी जमीयते उलमा सूरत शहर, गुजरात, इंडिया

मेमरी कार्ड में फिल्म और गाना डाउनलोड करने का कारोबार करते है उन की कमाई कैसी है ?

जवाब
حامدا و مصلیا مسلما

उन की कमाई मकरूहे तहरीमी (हराम के क़रीब क़रीब) है।

दरसी सवाल जवाब सफा ३१
बा हवाला मजमउल अन्हूर ४/१८८

हिजरी तारीख़ :
२४ / रबीउल अव्वल ~ १४४१ हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

 

पतंगबाजो ओर उसके मुतल्लीक सामानकी तिजारत करने का शरई लिहाज़ से क्या हुक्म है?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

पतंग के मुताल्लीक़ सामान की तिजारत का हुक्म ये है कि ये तिजारत” ईआ़नतुन अलल मासियह” ( गुनाह पर मदद करने) की बिना पर नाजायज़ है

(फतावा महमुदीया – 16 / 134)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

०१ जमादिउल अव्वल १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

हमारे वालिद साहब दुकान पर ‘दिवाली के दिये आँगन के रंग‘ लाइटिंग, पूजा की घंटि, सिन्दूर बेचते है.

कया ये चीज़ें बेचना जाइज़ है? आमदनी हलाल है?

जवाब:  حامدا و مصلیا و مسلما

इन तमाम चीज़ों का जाइज़ ईस्तिअमाल भी है, और ये चीज़ें दूसरे कामों में भी ईस्तिअमाल हो सकती है.

लिहाज़ा उस के नाजाइज़ ईस्तिअमाल की ज़िम्मेदारी बेचने वाले पर नहीं है, बल्के ईस्तिअमाल करने वाले पर है.

लिहाज़ा इन चीज़ों का बेचना जाइज़ और आम्दानी हलाल होगी।

फतवा कास्मिया जिल्द २९ सफा ३२४ से ३२७

बा हवाला शामी और अशबाह से माखूज़

अलबत्ताह दिवाली के मोके पर इन चीज़ों के बेचने से बचना बेहतर है।

किताबं नवाज़िल १०/२२७ से माखूज़

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़: २६ सफर उल मुज़फ्फर १४४० हिजरी

अभी पतंग के तेहवार का ज़माना चल रहा है,

बहुत से बाइक वालों के गले या चेहरे से पतंग की धारदार ड़ोर टकराती है और गला कट कर आदमी मर जाता है, या गला या चेहरा ज़ख़्मी हो जाता है।

तो अपनी सेफ्टी के लिए बाइक पर अगले हिस्से में  हिफ़ाज़ती तार लगाना अल्लाह पर तवक्कुल और तक़्दीर  पर भरोसे के खिलाफ है या नहीं ?

कया हिफ़ाज़ती तार लगा सकते है?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

तवक्कुल और तक़्दीर पर यक़ीन का मा’ना ये है के अस्बाब इख़्तियार करो,

फिर भरोसा अस्बाब पर न हो, बल्के अल्लाह की ज़ात पर हो,

हज़ूर ﷺ  ने फ़रमाया : ऊंट को नकील से बांधो, फिर उस की हिफाज़त के लिए तवक्कुल अल्लाह पर करो।

हिफ़ाज़ती तार भी अपनी जान और जिस्म की हिफाज़त के अस्बाब के दर्जे में है, लिहाज़ा उसे लगाना तवक्कुल और तक़्दीर पर एतिमाद के खिलाफ नहीं।

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

०५ जुमाद अल उला १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

(उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.)

हमारे वालिद साहब दुकान पर ‘दिवाली के दिये आँगन के रंग‘ लाइटिंग, पूजा की घंटि, सिन्दूर बेचते है.

कया ये चीज़ें बेचना जाइज़ है? आमदनी हलाल है?

जवाब:  حامدا و مصلیا و مسلما

इन तमाम चीज़ों का जाइज़ ईस्तिअमाल भी है, और ये चीज़ें दूसरे कामों में भी ईस्तिअमाल हो सकती है.

लिहाज़ा उस के नाजाइज़ ईस्तिअमाल की ज़िम्मेदारी बेचने वाले पर नहीं है, बल्के ईस्तिअमाल करने वाले पर है.

लिहाज़ा इन चीज़ों का बेचना जाइज़ और आम्दानी हलाल होगी।

फतवा कास्मिया जिल्द २९ सफा ३२४ से ३२७

बा हवाला शामी और अशबाह से माखूज़

अलबत्ताह दिवाली के मोके पर इन चीज़ों के बेचने से बचना बेहतर है।

किताबं नवाज़िल १०/२२७ से माखूज़

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़: २६ सफर उल मुज़फ्फर १४४० हिजरी

⭕आज का सवाल नंबर २५७५⭕

जानदार की तस्वीर वाले कपडोँ, डिब्बे, बॉक्स, मोबाइल कवर, अख्बार, किताबें बेचना कैसा है?

🔵आज का जवाब🔵

حامد ومصلیا و مسلما

जानदार की तस्वीर वाली मज़्कूरह ए बाला (ऊपर ज़िक्र की गयी) चीज़ों को बेचना जाइज़ है।

कयूं के उसमे तस्वीर मक़सूद नहीं होती, तस्वीर ताब’न ज़िमनन (गैर मक़सूद ) होती है, असल मक़सद उस चीज़ को खरीदना और बेचना होता है, लिहाज़ा उसका बेचना जाइज़ है।

अगर ख़रीदने वाले का मक़सद उस चीज़ की तस्वीर हो तो वह खुद गुनेहगार है, बेचने वाला नहीं।

📘इस्लाम और जदीद म’आशी मसाइल ४/१७,१८

و الله اعلم بالصواب

 

🟢आज का सवाल नं.2️⃣6️⃣0️⃣0️⃣🟢

तिज़ारत में अगर रूपया पैसा खोटा (डुप्लीकेट) आ जाये तो कया करे ?

🟢जवाब🟢

حامد ومصلیا و مسلما

अगर मा’लुम है के किस के पास से आया है तब तो उसी को दे दे, जिस तरह भी मुमकिन हो, चाहे बता कर, चाहे धोखा दे कर, (चुपके से इसलिये के यह हकीकत में अपने हक़ को हासिल करना है जो जाइज़ है)

अगर मा’लुम न हो तो किसी और को धोखा देना जाइज़ नहीं, बता कर दिया जाए, चाहे लेने वाला कम क़ीमत पर ले,

या अगर किसी जगह उसे ज़ुल्मन लिया जाये तो वहाँ बिला बताये भी देना दुरुस्त है।
(जैसे बाज़ सरकारी लोगो को जो बिला रिश्वत काम नहीं करते और बाज़ ज़ुल्मी टैक्स भरने में)

📗 फ़तावा महमूदिया दाभेल १६/१७२
बाहवाला दुर्रे मुख़्तार मा रददिल मुहतर

و الله اعلم بالصواب
नोट :- ऊपर बताया गया है वो शरई हुक्म है । बाकी सरकारी गाइडलाइन इस बारे मे जो भी है, उसे मालूम करके फौलो करना ज़रूरी है ।

⭕आज का सवाल नंबर २६०१⭕

ज़ैद ने अपनी सवारी उमर को दुरुस्त करने के लिए दी, रात तक उमर ने सवारी दुरुस्त नहीं की, ज़ैद ने अपनी सवारी को बंध कर के उमर के जाएकार (गेरेज़) के बहार छोड दी,
उमर के पास गेरेज़ के अन्दर रखने की जगह नहीं थी,
ज़ैद अपनी सवारी को घर ले जा कर वापस भी ला सकता था।

रात को उमर के गेरेज़ के बहार से ज़ैद की सवारी चोरी हो गयी, इस सवारी का कौन जामीन (ज़िम्मेदार) है ?
ज़ैद या उमर ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

सूरते मस’ऊला में ज़ैद ने अपनी सवारी दुरुस्त न होने की वजह से वापस ले ली थी, याने अक़दे इजारह (मज़दूरी) पर बनने का मुआमला फ़सख़ (कैंसल) कर लिया और अपने क़ब्ज़े में लेने के बाद उमर के गेरेज़ के बाहर रखी और चोरी हो गयी।

उमर पर उसका कोई जिमान (ज़िम्मेदारी) नहीं है।

और अगर ज़ैद ने अपनी सवारी वापस नहीं ली थी बल्कि गेरेज़ में जगह न होने की वजह से उमर के केहने से गेरेज़ के बाहर बंध कर के रखी, वह जगह महफ़ूज़ जगह थी, वहाँ से किसी के उठा लेने का अंदेशा नहीं था, इस सूरत में भी उमर पर ज़मान नहीं।

ओर अगर वह महफ़ूज़ जगह नहीं थी फिर भी उमर ने बाहर रखवाई तो हिफाज़त में कोताही की वजह से उमर पर जिमान (पैसे) देने लाजिम है।

📘महमूदुल फ़तावा

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नंबर २६१९⭕

मे कंप्यूटर की तिजारत शुरू करने जा रहा हूं, और खुद कंप्यूटर इंजीनियर हूं, मुझे तिजारत शुरू करने से पहले दीनी ऐतिबार से क्या करना चाहिए ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

(१) इस्लाम ने ज़िन्दगी के हर शो’अबे के लिए रहनुमाई की है, इन्सान के लिए ज़रूरी है के वह जिस शो’अबे में दाखिल हो उसके बारे में अहकामे शरीअत की वाक़फ़ियत हासिल करने की कोशिश करे।

चुनांचे रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इर्शाद फ़रमाया के : हर मुस्लमान पर इल्म का हासिल करना फ़र्ज़ है।

(२) इसमें वह तमाम उलूम शामिल है जिन का दीन पर अमल करने के लिए ज़रुरत पड़े या जो रोज़ी कमाने के लिए हासिल करना ज़रूरी है।

चुनांचे फ़तवा ए सिराजिया में है:
ईल्म का इतनी मिक़्दार में हासिल करना फ़र्ज़ है जिस की ज़रुरत हो।

ऐसे कामो के सिलसिले में जो उसके लिए उसके बगैर चारा न हो, जैसे वुजू, नमाज़ दुसरे शर’ई अहकाम और म’आशी उमूर- घरेलु मसाइल।

(३) कंप्यूटर की तिजारत के लिए भी बहोत से शर’ई मसाइल हो सकते है, जैसे सूदी लेन देन से बचना, महफ़ूज़ प्रोग्रामो की चोरी से परहेज़ करना, अगर कंप्यूटर के साथ साथ सीडी भी फ़राहम करते हो तो अख़लाक़ को बिगाडने वाली सीडियों की ख़रीदो फरोख्त से बचना।

पस आप सब से पहले तिजारत और बिल्खुसुस अपने शोअबे के मुतअल्लिक़ मसाइल व अहकाम की वाक़फ़ियत हासिल करने की कोशिश करे और उस बात का पुख्ता इरादा रखे के झूठ, धोखा, और बद-दयानति से अपने आप को बचाएँगे।

बल्कि फुक़हा ने लिखा है के जब तक आदमी ख़रीदो फरोख्त के अहकाम से वाक़िफ़ न हो जाए उसे तिजारत शुरू न करनी चाहिये।

(इस बारे में बड़ी कोताही है के अपने कारोबार के मसाइल सीखे बगैर ही कारोबार करते रहते है!)

📕 फतावा महमूदिया ९/३७८

و الله اعلم بالصواب