शबे बरात की इबादत का सुबूत

शबे बरात की इबादत का सुबूत

आज का सवाल नंबर १७०१

क्या शबे बरात में नमाज़ और दिन में रोज़े का सुबूत साबित है?
बाज़ हज़रात कहते हैं इस की रिवायत बहुत ज़ईफ़ है लिहाज़ा इस रात का मानना सहीह नहीं क्या ये बात सहीह है?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

शबे बरात में बिला किसी क़ैद व खुसूसियत के मुतलक़ नमाज़ का सुबूत है (रात के किसी खास वक़्त में किसी खास तरीके से के फुलां सूरत इतनी मर्तबा पढ़ो इस तरह की नमाज़ साबित नहीं) हर शख्स अपने तौर पर इबादत करे, जिस में किसी नुमाइश (रियाकारी) और किसी रस्म और आयते मख़सूसाह (मस्जिद ही में इजतमई शकल बनाकर नमाज़ पढ़ना नवाफिल की जमात करने) की पाबन्दी न हो तो मुस्तहसन (पसन्दीदाह) है.

सुबूत

हज़रत अली रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत है के रसूलुल्लाह सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया जब १५ शाबान की रात हो तो उस की रात में नमाज़ और उस के दिन को रोज़ा रखो अल्लाह ताला सूरज डूबने के वक़्त (रोज़ाना रात के तीन हिस्से गुज़रने बाद) आसमान दुनिया की तरफ मुतवज्जह होते है और फरमाते है
“है कोई मगफिरत चाहने वाला के उसे मुआफ करूँ, है कोई रिज़्क़ चाहने वाला के उसे रिज़्क़ आता करूँ, है कोई परेशां हाल के उस की परेशानी दूर करूँ, है कोई ऐसा, है कोई वैसा, यहाँ तक के सुबह सादिक़ हो जाती है.

इब्ने माजह किताब इक़ामतीस सलत बाबु मा जा फी लैलतीं निस्फी मिन शाˋबान सफा ९९ क़दीमी

फतवा महमूदियाः ३/२६४ दाभैल

गैर मुक़ल्लिद के बड़े अल्लम्ह नासिर अल्बानी ने रिवायत नक़ल की है के हज़रत मुआज बिन जबल रदियल्लाहु अन्हु से रिवायत है के हुज़ूर सलल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : अल्लाह ताला १५ शाबान की रात में अपनी मख्लूक़ की तरफ मुतवज्जह होते है और मुशरिक और दिल में किना रखनेवालों के अलावह सब की मगफिरत कर देते है

तबरानी इब्ने हिब्बान

ये रिवायत ८ सहाबा से मुख्तलिफ सनद से मरवी है लिहाज़ा ये हदीस बेशक सहीह है, आगे लिखते है के सख्त ज़ईफ़ होने से ये हदीस सलामत है, शेख क़ासमी रहमतुल्लाहि अलैहि ने इस्लाहुल मसजिद सफा १०७ पर उलमा ए जारहो तदील के हवाले से जो लिखा के १५ शाबान की रात की इबादत किसी भी सहीह हदीस से साबित नहीं ये कहना सिर्फ जल्द बाज़ी और हमारी तरह हदीस के तुरुक और उस की तहक़ीक़ की खूब मेहनत न करने का नतीजाः है. शेख अल्बानी की कलम ख़त्म हुवा.

फ़ज़ाईलुलैलतीननिस्फी मिन शाबान सफा २२

शैख़ अल्लाम्ह मुहद्दिस अब्दुल मालिक अब्दुल हक़ मक्की रहमतुल्लाहि अलैहि कि इस किताब में १५ शाबान की इबादत का १५ रिवायत से सुबूत और सहाबा ताबीइन से इस के मानने का सुबूत और दलील मव्जूद है, इस किताब को भी इस मेसेज के साथ भेजा जा रहा है, लिहाज़ा इसे पढ़े और न माननेवालों को पहुंचाए, अल्लाह की ज़ात से उम्मीद है १५ शाबान की रात की इबादत के सुबूत का इंकार करने वाले अपनी ज़िद से बाज़ आएंगे और हक़ बात को तस्लीम करेंगे.

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
१३~शा’बान~अल~मुअज़्ज़म~१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

[button color=”red” size=”big” link=”https://www.aajkasawal.in/subscribe-kare/” icon=”” target=”true”]SUBSCRIBE TO AAJ KA SAWAL[/button]

Leave a Reply