aaj ka sawal hindi

⭕आज का सवाल नंबर २५९१⭕

ओरत टीचिंग कर सकती है?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

पढ़ने वाली औरतें, या छोटे बच्चे हो तो तालीम दे सकती है।

अगर बड़े लड़के हो तो परदे के शराइत का लिहाज़ करते हुवे फ़ितने का अंदेशा न हो तो गुंजाईश है।

बाशर्त के तालीम जाइज़ उमूर-कामों की होनी चाहिये।

📕महमूदुल फ़तावा ८/२८

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नंबर  – २६०४⭕

ईमाम व मुदर्रिस हजरात की कमअज़ कम माहाना (मंथली) तन्ख्वाह कितनी रखनी ज़रूरी है ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

असल मज़हब यह है के किसी ता’अते मक़्सूदाह (फ़र्ज़ इबादत) पर उजरत लेना जाइज़ नहीं। मगर जिस ता’अत में हमेशगी या पाबन्दी की ज़रुरत है और शीयार ए  दीन में से है के उनके बंध होने से दीन में ख़लल (कमी) लाज़िम आवेगी और वैसे किसीको मोहलत  (टाइम) नहीं इसकी पाबन्दी करने के लिये, लिहाज़ा ऐसे उमूर को इस कायदह से अलग कर दिया है, इमामत और तदरीस कुर’आन व फ़िक़ह भी इन्ही उमूर में से है।(शामी- ३८/५)
जब एक शख्श तमाम उमूर से किनारा काश हो कर अपने आप को इमामत और तदरीस कुर्’आन व फ़िक़ह में मशगुल किये हुवे है तो मुस्लमानो को भी चाहिए के उसकी ज़रूरियाते ज़िन्दगी की कफ़ालत पूरी करे और कम  अज़ कम उसको इतनी तन्ख्वाह दे के जिस्से उसकी ज़ात और उसके अहलो अयाल (जिनका नफ़्क़ा- खर्चा उसपर वाजिब है) का गुजरान हो सके,(इस में नया पुराना देखा न जाए ज़रुरत देखि जाए)

📗महमूदुल फ़तवा ८/२४९

و الله اعلم بالصواب

⭕आज का सवाल नंबर – २६०५⭕

दीनी दर्सगाह, स्कुल्, ट्यूशन में शा’बान में ४ मुदर्रिसों- उस्ताज़ों- टीचर्स को अलाईदह कर दिया, शव्वाल (वेकेशन के बाद,) में उनको वापस पढाने के लिए लाना नहीं है, २ महीने रमजान- या वेकेशन की छुट्टीयों तन्ख्वाह का शरई के ऐतबार से मुस्तहिक़ है या नहीं ?

🔵 जवाब 🔵

حامدا و مصلیا مسلما

मुदर्रिसीन- टीचर्स के तक़र्रुरी- नोकरी पर रखते के वक़्त उन के साथ जो शराईत तय किये गए है, उन के मुवाफ़िक़ अमल किया जाए ।

अगर साफ़ साफ़ शराईत तय नहीं किये गये, लेकिन मदारीस, स्कूल्, ट्यूशन के क़वाइद लिखे हुवे और मारूफ़- मशहूर हैं तो वह भी शर्त के दर्जे में होंगे (ऐसा समझा जायेगा के जॉब पर रखने से पहले ये शर्त की थी)
और अगर शर्त न साफ़ साफ़ बयान की है न मशहूर है तो दूसरे मदारिस इस्लामियाह में जो मशहूर है उनका इत्तिबा’अ किया जाए। या’नि उन के क़ायदों पर अमल होगा।

📗महमूदुल फ़तवा ८/२५१

و الله اعلم بالصواب