aaj ka sawal hindi

⭕आज का सवाल नं. २६९६⭕

कौन से शेयर खरीदना जाइज है और कौन से खरीदने नाजाइज है ?

🔵आज का जवाब 🔵

जीस कंपनी का कारोबार शरीअत के खिलाफ न हो उस कंपनी के शेयर खरीदना यानी कंपनी में हिस्सेदार बनना जाइज है

और जीस कंपनी का कारोबार शरीअत के खिलाफ हो उस्के शेयर खरीदना जाइज नहीं।

📗फतावा उस्मानी ३/१७७ से माखूझ

و الله اعلم بالصواب

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

⭕आज का सवाल नंबर २६९७

आज कल ऑनलाइन शेयर खरीद कर उसी दिन भाव बढ़ जाये तो बेच देते है।
हमारे खाते में से पैसे कट जाते है और खरीदने वाले में हमारा नाम भी बताता है।
तो ये ट्रेडिंग सहीह है ?

🔵आज का जवाब🔵

حامدا و مصلیا و مسلما

मज़्कूरह सूरत में जब तक शेयर पर आप का क़बजह न हो आगे बेचना नाजाइज़ है।

और हमारी (करांची के दारुल इफ्ता की जमात) की तहक़ीक़ात के मुताबिक़ शेयर क़ब्ज़ा में तीन दिन पहले नहीं आता, लिहाज़ा ऑनलाइन खरीदने के बाद तीन दिन पहले बेचना जाइज़ नहीं।

📗फतावा उस्मानी ३/१७८से १८६
शैखुल इस्लाम हज़रत मुफ़्ती तकि उस्मानी करांची दा.ब. की

و الله اعلم بالصواب

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडि

⭕आज का सवाल नंबर. २६९९⭕

शेयर बाजार में
बी.एस.इ. लिमिटेड (इंडिया) में शेयर खरीदने के थर्ड डे पुल्ल डीपी (ब्रोकर के अकाउंट में ) डिलीवरी आ जाती है.
(यानी पीर के रोज़ ख़रीदे हुए शेयर्स की डिलीवरी बुध के रोज़ ब्रोकर के अकाउंट में
(जिसे पुल्ल डीपी कहते है) जमा हो जाती है.
तो पीर के रोज़ ख़रीदे हुए शेयर्स बुध के रोज़ बेच सकते है या नहीं ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا و مسلما

शेयर पर क़ब्ज़ा ज़रूरी है और शॉर्ट सेल में क़ब्ज़ा शेयर सिर्फ कागज़ और सार्टिफिकेट मिल जाने का नाम नहीं बल्कि कंपनी के कारोबार में बाक़ाइदाह शरीक होने का नाम है क़ब्ज़ा सिर्फ अकाउंट में से पैसे कट जाने से या आप के नाम पर शेयर ट्रांसफर हो जाने से या शेयर का भाव ; घटने और बढ़ने से नहीं होता है बल्कि सामने वाली कंपनी का अपना क़ब्ज़ा छोड़ना या दूसरे का क़ब्ज़ा हटाना भी ज़रूरी है जैसे स्टॉक एक्सचेंज की डिफेंस में ‘बाय इन’ कहा जाता है वह ज़रूरी है और ऐसा होते हुवे तीन दिन लग जाते है ये बात रूल्स फॉर रेडी डिलीवरी कॉन्ट्रैक्ट्स की पहली दफा में लिखी हुई है.

क़ब्ज़ा न होने की एक दलील ये भी है शेयर बेचने वाली कंपनी को ज़ैद को शॉर्ट सेल करने के बाद ज़ैद ही को वह शेयर बेचने पर मजबूर नहीं कर सकते वह चाहे तो बकर को भी बेच सकती है और न बेचना चाहे तो यूँ भी कह सकती है के ज़ैद तुम इतनी कीमत के इसी कंपनी के शेयर इतनी ही मिक़दार में बाजार से खरीद लो बेचने वाले को ये इख़्तियार भी बता रहा है उस ने क़ब्ज़ा नहीं छोड़ा था.

इस को एक मिसाल से समझो जैसे आप ने उस मकान को खरीदा जिस में रहता हूँ पैसे भी दे दिए और क़ब्ज़ा रशीद भी आप के नाम की बन गई लेकीन मेने उस घर का क़ब्ज़ा छोड़ा नहीं है बल्कि उस में रह रहा हूँ आप के पुरे इख़्तियार में वह घर आया नहीं है के जब चाहे रहने आ जाओ या किसी को रहने भेज दो तो ये घर पर क़ब्ज़ा नहीं हुवा कोई भी क़ुदरती आफत सेलाब, ज़लज़ला आएगा तो नुकसान मेरा ही शुमार होगा क्यों के में ने उस घर का क़ब्ज़ा नहीं छोड़ा है. और उस को घर को में किसी और को भी बेच सकता हूँ कियूं आप ने क़ब्ज़ा नहीं लिया है.
लिहाज़ा मज़्कूरह सूरत में पीर को kharide huwe शेर को बुध को बेचना जाइज़ नहीं.

و اللہ اعلم

📘फतावा उस्मानी जिल्द ३ सफ़ा १७८ से १८६ बहस का खुलासा मा मिसाले ज़ैद

و الله اعلم بالصواب

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

⭕आज का सवाल नंबर २७००⭕

शेयर हम ख़रीदते है तो उसी दिन हमारे अकाउंट में से पैसे कट कर हमारे इख़्तियार में आ जाता है।
हम उसे आगे भी बेच सकते है।

ऐसे क़ब्ज़े को बाज़ मुफ्तियाने किराम सहीह कहते है।

और आप के भेजे हुवे फ़तवे में तिन दीन बाद लिखा था, और लोग एक दिन वाले क़ौल पर अमल कर कर है तो इस की गुंजाईश है या नहीं ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

शेयर में हक़ीक़ी और महसूस तरीक़े से क़ब्ज़ा होता नहीं है बल्कि हुकमी क़ब्ज़ा होता है, और हुकमी क़ब्ज़े की तारीफ- (defination) में फुक़्हा का इख्तिलाफ है।

लिहाज़ा अगर शेयर ख़रीदार की पुरे रिस्क और ज़िम्मेदारी में इस तौर पर आ जाता हो इस तरीक़े पर के अब जो भी नफ़ा या नुक़्सान हो तो इसी ख़रीदार का समझा जायेगा, तो ऐसे क़ब्ज़े की भी बाज़ मुफ्तियाने किराम ने जो गुंजाईश दी है उसपर भी अमल कर सकते है।

स्टॉक एक्सेंज में सोदो के कंप्यूटर के रिकॉर्ड में खरीदार का नाम तो दर्ज हो जाता है लेकिन पैसे दो दिन के बाद देने होते है, और बेचने वाला असल डिलीवरी भी दो दिन बाद देता है, लिहाज़ा बेहतर और एहतियात यही है के दो तीन दिन बाद शेयर आगे बेचा जाए।

📘जदीद मालियति इदारे फ़िक़्हे इस्लामी की रौशनी में ८२

📗जदीद फ़िक़्ही मसाइल जिल्द १ और ४

📕फतवा दारुल उलूम ज़करिया ५/२२८

و الله اعلم بالصواب

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

⭕आज का सवाल नंबर २७०१⭕

हर कंपनी अपने जाइज़ कारोबार में लोन लेती है, मशीनरी, ज़मीन वगैरह के लिए और फिक्स डिपॉजिट् में भी अपनी एक रक़म रखती है।
तो उसका नफ़ा लेना कैसा है ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

शेयर ख़रीदने से पहले ये बात भी ज़रूरी है के उन को सालाना मीटिंग में या ईमेल कर के ये बात कही जाये के में मुसलमान हूं, 
हमारे मज़हब में सूद- इंटरेस्ट हराम है।
लिहाज़ा किसी तरह सूदी मुआमले से में राज़ी नहीं हूँ, मुझे इस का नफ़ा नहीं चाहिए।

अगरचे लोग आप की बात सुनेगे नहीं बल्कि आप की आवाज़ ढोल की आवाज़ के सामने चिड़िया की आवाज़ की तरह होगी।

लेकिन इस तरह हराम मुआमले और हराम नफ़े से बरीउज़ज़िम्मा होना ज़रूरी है, ताके हमारी शिरकत- पार्टनरशिप सिर्फ हलाल में हो।

और हर कंपनी फिक्स डिपोजिट में भी नफ़े के लिए क़ानून की वजह से पैसा रखती है। लिहाज़ा उस के नफ़े में से आप के शेयर के नफ़े का जितना फीसद, (%) टका के ऐतिबार से बाँटा हो उतना मसलन २% निकाल कर गरीब को बगैर सवाब की निय्यत से सदक़ा ज़रूरी है।

📗 फ़तावा दारुल उलूम ज़करिया ५

📘फ़िक़्ही मसाइल से माखूज़

و الله اعلم بالصواب

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

⭕आज का सवाल नंबर २७०२ ⭕

शोर्ट सेल जाइज़ है या नहीं ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

शोर्ट सेल यानि गैर मम्लूक को बेचना ।
यानि बेचने वाला ऐसे शेयर को बेचता है जो उस की मिल्क में आये नहीं है, वह इस उम्मीद पर सोदा कर लेते है के वह चीज़ में खरीदार को दे दूंगा लिहाज़ा शोर्ट सेल जाइज़ नहीं ।

و الله اعلم بالصواب

📗 फतावा दारुल उलूम ज़करिया ५/२२८

و الله اعلم بالصواب

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

⭕आज का सवाल नंबर २७०५⭕

शेर के कारोबार में फ्यूचर सेल करना कैसा है ?


🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

शेर की इस क़िस्म में मक़सूद शेर खरीदना नहीं होता है, बल्कि सिर्फ नफ़ा नुक़्सान बराबर करना होता है, ये भी जुवे और सत्ते की एक क़िस्म है।
लिहाज़ा जाइज़ नहीं।

📗(फ़तावा ज़करिया ५/२२७)

و الله اعلم بالصواب

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

⭕आज का सवाल नंबर २७०६⭕

फॉरवर्ड सेल यानि मेरे पास क़ब्ज़े में शेयर है, उस को आइन्दह की तारीख, एक हफ्ते या महीने बाद के लिए अभी से बेच कर सौदा मुक़म्मल कर लूँ।
तो ये कैसा है?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

शेयर की ये शकल जिस में आइन्दह का सौदा अभी से हो जाइज़ नहीं।

📗 फ़तावा दारुल उलूम ज़करिया ५/१२८

و الله اعلم بالصواب

✍🏻मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
🕌उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.