aaj ka sawal hindi

दुकान और जीवन बिमा- लाइफ ईनसूरन्स क़ानूनी मजबूरी में लिया हो तो उस की जमा की हुयी रक़म की ज़कात निकलना ज़रूरी है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

दुकान, कारोबार और कार बिमा की रक़म वापस मिलना यक़ीनी और ज़रूरी नहीं, इसलिए उसपर ज़कात वाजिब नहीं।

अल्बत्ताह जीवन बिमा में हर हाल में रक़म सूद के साथ वापस मिलती है, इसलिए भरी हुयी असल पूरी रक़म मिलने के बाद गुज़रे हुवे तमाम सालों की ज़कात वाजिब होगी (हर साल उस की ज़कात पेशगी-एडवांस निकाल सकते है, ता के एक साथ निकालने का बोज न आये) और जो रक़म जियादह मिलेगी वह हराम और सूद है इसलिए उस पर ज़कात वाजिब नहीं।

(किताबुल मसाइल २/२१७)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
०८शा’बानअलमुअज़्ज़म१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

 

अगर किसी ने बैंक के ज़रिये गाड़ी खरीदी, फिर वह गरीब हो जाता है, बैंक की रक़म अदा नहीं कर सकता तो बैंक गाड़ी उस से ज़ब्त कर लेती है, और जो रक़म अदा नहीं हुई उतने में बेच ड़ालती है, क्या ऐसी ‘बैंक की क़ब्ज़ा की हुई गाड़ी‘ खरीदना जाइज़ है?

मकानात में भी उस क़िस्म का मुआमला होता है, ऐसे मकान खरीदना जाइज़ है?

जवाब:  حامدا و مصلیا و مسلما

अगर बेंक का ये तसर्रुफ़ (इख़्तियार) हुकूमत की ताईद और तौसीक़ (इजाज़त) से है, तो ख़रीदने की वजह से मिलकियत साबित होगी।

लेकिन इस किसम की खरीदी “बैंक की क़ब्ज़ा की हुई गाड़ी” से एहतियात बरतनी चहिये।

“बैंक की क़ब्ज़ा की हुई गाड़ी“

महमूदुल फ़तवा ५/४११

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारिख :२१ मुहर्रमुल हराम१४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

⭕आज का सवाल नंबर २६०८⭕

एक आदमी का सूदी कारोबार है, उसने किसी को कपडा हदीया दिया, तो उस कपडे को इस्तेमाल कर सकते हैं या नहीं ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

👉 अगर उसकी तमाम या अक्सर आमदनी सूदी है, तो यह हदीया लेना दुरुस्त नहीं है।

अलबत्ता अगर वह यह बतलाता है के यह कपडा हलाल तरीक़े से हासिल किया हुवा है, तो यह ले सकते हैं।

👉और उसकी अक्सर आमदनी हलाल है तो लेना जाइज़ है।

अलबत्ता अगर मालुम हो जाए के यह कपडा हराम तरीक़े से हासिल किया हुवा है तो लेना जाइज़ नहीं है।

📗फ़तावा महमूदिया १६/४८१)

و الله اعلم بالصواب

⭕आज का सवाल नंबर २६११⭕

ज़ैद २ लाख रुपये उमर से उधार ले रहा है, और कहता है के एक साल के बाद २ लाख के बदले २.५० (ढाई लाख) दूंगा।
पचास हज़ार हदीये में अपनी ख़ुशी से दुँगा, तो ज़ैद से यह पैसे लेना उमर के लिए जाइज़ है ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

ज़ैद से यह पैसे लेना और देना दोनों सूद है, लिहाज़ा जाइज़ नहीं।

📗महमूदुल फ़तवा ८/३६२

و الله اعلم بالصواب