बीमे (इन्शुरन्स) की रक़म पर ज़कात १६९६

दुकान और जीवन बिमा- लाइफ ईनसूरन्स क़ानूनी मजबूरी में लिया हो तो उस की जमा की हुयी रक़म की ज़कात निकलना ज़रूरी है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

दुकान, कारोबार और कार बिमा की रक़म वापस मिलना यक़ीनी और ज़रूरी नहीं, इसलिए उसपर ज़कात वाजिब नहीं।

अल्बत्ताह जीवन बिमा में हर हाल में रक़म सूद के साथ वापस मिलती है, इसलिए भरी हुयी असल पूरी रक़म मिलने के बाद गुज़रे हुवे तमाम सालों की ज़कात वाजिब होगी (हर साल उस की ज़कात पेशगी-एडवांस निकाल सकते है, ता के एक साथ निकालने का बोज न आये) और जो रक़म जियादह मिलेगी वह हराम और सूद है इसलिए उस पर ज़कात वाजिब नहीं।

(किताबुल मसाइल २/२१७)

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
०८~शा’बान~अल~मुअज़्ज़म~१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

बैंक की क़ब्ज़ा की हुई गाड़ी खरीदना १५०२

अगर किसी ने बैंक के ज़रिये गाड़ी खरीदी, फिर वह गरीब हो जाता है, बैंक की रक़म अदा नहीं कर सकता तो बैंक गाड़ी उस से ज़ब्त कर लेती है, और जो रक़म अदा नहीं हुई उतने में बेच ड़ालती है, क्या ऐसी ‘बैंक की क़ब्ज़ा की हुई गाड़ी‘ खरीदना जाइज़ है?

मकानात में भी उस क़िस्म का मुआमला होता है, ऐसे मकान खरीदना जाइज़ है?

 

जवाब:  حامدا و مصلیا و مسلما

अगर बेंक का ये तसर्रुफ़ (इख़्तियार) हुकूमत की ताईद और तौसीक़ (इजाज़त) से है, तो ख़रीदने की वजह से मिलकियत साबित होगी।

लेकिन इस किसम की खरीदी “बैंक की क़ब्ज़ा की हुई गाड़ी” से एहतियात बरतनी चहिये।

बैंक की क़ब्ज़ा की हुई गाड़ी

महमूदुल फ़तवा ५/४११

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारिख :२१ मुहर्रमुल हराम१४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.