aaj ka sawal hindi

११ गियारहवी की नियाज़ खाने की हक़ीक़त क्या है ?

क्या मालदार आदमी गियारहवी का खाना खा सकता है ?

और गरीबो का उस दावत में शिरकत का क्या हुक्म है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

किसी भी इस्लामी महीने की गियारहवी (११) तारीख को महबूबे सुब्हानी पीराने पीर हज़रत शैख़ अब्दुल क़ादिर जीलानी रह. की निय्यत से जो खाना पकाया जाता है उसे गियारहवी कहते हैं.

इख्तिलाफ ए उम्मत और सिरते मुस्तक़ीम
हज़रत मुफ़्ती युसूफ लुधयानी शहीद रह. की किताब

अगर वह खाना हज़रत शैख़ रह. के नाम की मन्नत का हो, या उनका तकररुब हासिल करना हो, यानी नियाज़ करेंगे तो हज़रत खुश हो कर हमारी मुराद पूरी करेंगे तो वह हराम है, आम तौर पर यही निय्यत होती है, और उनके नाम की मन्नत मानना शिर्क है, मन्नत सिर्फ अल्लाह के नाम की ही मानना जाइज़ है.

किसी ऊँचे से ऊँचे बुलंद रुतबा मख्लूक़ के नाम की मन्नत मानना हराम और शिर्क है, और ऐसी हराम मन्नत का खाना खाना मालदार और गरीब किसी के लिए भी जाइज़ नहीं.

(शामी: २/१२८ २/२९८)

अगर हज़रत शैख़ जीलानी रह. के इसाले सवाब की गरज़ से अल्लाह ता’अला के नाम की मन्नत मानी हो, या मन्नत माने बगैर हज़रत शैख़ के इसाले सवाब के खातिर पका कर खिलाये तो ऐसा खाना गरीब लोग खा सकते हैं, मालदार नहीं खा सकता, क्यों के मन्नत का खाना मालदार के लिए जाइज़ नहीं, और गरीबों को खिला कर सदक़ह का इसाले सवाब कर सकते हैं, अलबत्ता इसाले सवाब के खाने के लिए कोई तारीख और दिन ज़रूरी समझना यह बिदअत और नाजाइज़ है.

शामी: १ फतावा महमूदियाः: १० /९८
जुब्दतुल फतावा गुजराती: १/२०६

و الله اعلم بالصواب

फतावा सेक्शन
मुफ़्ती सिराज चिखली नवसारी गुजरात

तस्दीक़ व इज़ाफ़ा
मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

आप क्या कहते है पिज़्ज़ा हट के.एफ.सी. मैक्डोनाल्ड्स होटलो में खाने के मुताल्लिक़ जो के पाकिस्तान में है, ये हलाल है या हराम ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

उन होटलो में पकाया जाने वाला चिकन या दूसरा गोश्त अगर वाक़ियतन इस्लामी शराइत के मुताबिक़ जबीहा का हो, इसी तरह मुख़्तलिफ़ चिज़ों में डाली जाने वाली चीज़ और पकाने का तेल वगैरह में किसी क़िस्म के हराम अज्ज़ा की आमेज़िश न की गयी हो,

और ये उमूर यक़ीनी तौर पर या गालिबन गुमान के दर्जे में साबित हो जाये तब तो उनके तैयार किये गए खाने खाने की इजाज़त है, वरना उनसे एहतेराज़ ही किया जाए।

जब के उमूमी तौर पर भी ये होटल अपने आलमी मेयार बर्करार रखने का ज़ियादा ख़याल रखने के साथ साथ मशीनी जबीहा से भी एहतेराज़ नहीं करते जो ना जाइज़ है।

ईसी लिए उनमे तैयार किये जाने वाले खाने का तमाम अज्ज़ा के हलाल होने का यक़ींन न हो जाये उस वक़्त तक उनके खाने खाने से अहतेराज़ ही किया जाये तो ये ज़ियादा बेहतर है।

माज़ी सदर मुफ्ती दाभेल गुजरात हज़रत अक़दस मुफ्ती अहमद खानपुरी दा ब. ने फ़रमाया के : अगर वहां खिनजिर-सुव्वर का गोश्त भी पकाया जाता है तो उस के चम्मच और बर्तन के इस्तिअमाल में एहतियात नहीं करते।

अगर गोश्त हलाल भी हो तो उसे नापाक बर्तन लग ही जाते है। जिस से वह खाना भी नापाक होता है।

क़ुरान सुरह अनआम आयत १२१
सूरत नहल आयत ११५
सहीह मुस्लिम

हज़रत मुफ्ती हुसैन करांची दा.ब.

नॉट
गोश्त के हलाल होने में गैर मुस्लिम इदारे कंपनी की गवाही मोअतबर नहीं। चाहे उन के लेटर पैड पर मुसलमान आलीम या इदारे के दस्तखत साइन हो।

और गैर मुस्लिम की होटल का मुसलमान मुलाज़िम नोकर कहे के ये गोष्ट हलाल है तो भी उस की गवाही मोअतबर नही।

मुफ़्ती फ़रहान वारिस साहब
दारुल फ़तावा वल क़ज़ा
जामिआ बीननोरीया करांची

و الله اعلم بالصواب

हिजरी तारीख़ :०१ / रबीउलआखर ~ १४४१ हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

आल्कोहोल मिली हुई दवाई, क्रीम वगैरह चीज़ों के ईस्तिअमाल का क्या हुक्म है ?

जवाब
حامدا و مصلا مسلما

आल्कोहोल अँगूर, किश्मिश और खजूर के अलावा दूसरी चीज़े मसलन गेहूं, चावल जव, पेट्रोल, केमिकल और दूसरे फूलों और सब्ज़ियो से निकाले जाते हो तो ऐसे अल्कोहल मिली दवाई और दुसरी चीज़ों के इस्तेमाल में हरज-प्रॉब्लम नहीं है।

और आमतौर पर दवाओं और क्रीम में जो आल्कोहोल ईस्तिअमाल होता है वह अंगूर और खजूर से बना हुवा नहीं होता। इसलिए इन चीज़ों के ईस्तिअमाल की गिंजाईश है।
و الله اعلم بالصواب

तकमीलह ए फत्हुल मुल्हीम
जिल्द ३ पेज ३०८
फ़तावा दारुल उलूम १६/१२
ऑनलाइन दारुल इफ्ता जामिआ इस्लामिया बिनोरिया कराची, जवाब नंबर ६५१६४

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
२७शव्वाल उल मुकररम१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

 

आजकल वोट देने वाले उमैदवार की जानिब से पैसे, नाशता, खाना दिया जाता है।
इसके खाने के बाद फिर उनको वोट देनेके क्या हुक्म है?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

वोट देना ये गवाही है इस बात की के इस हलके वॉर्ड के जित्ने उम्मीदवार है उन में से ये शख्स उस ओहदे के सबसे लायक व मुनासिब है.

लिहाजा पैसा या खाना खाकर दूसरे लायक व ज्यादा मुनासिब उम्मीदवार को छोड़कर इस गैर लायक व कम मुनासिब आदमी को वोट देने मे डबल गुनाह है।

एक रिश्वत लेने का।
चूनांचे रिश्वत लेनेवाले पर हदीसशरीफ मे ल़ानत (अल्लाह का गज़ब, फटकार, जन्नतसे मरहुमी) की वईद आई है।

दूसराजुठी गवाही देने का।
जिस्को अल्लाह तआलाने शिर्क के बराबर करार दीया है

लिहाज़ा ऐसे पैसे और खानेसे बचना चाहिए.

(किताबूल फतावा ६/२६३ से माखुझ।)
و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
१६शा’बानअलमुअज़्ज़म१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया

नीरा कब पिये कब नहीं: आज कल सर्दी का मौसम चल रहा हे, और ऐसी मौसम में अक्सर लोग नीरा (खजूरी के दरख़्त से निकलने वाला रस) पीते हे, शरीअत की रौशनी में इस का क्या हुक्म हे और कब से कब तक इसे इस्तेमाल कर सकते हे ?

जवाब: حامدا و مصلیا و مسلما

नीरा (खजूरी ताड़ के दरख्त से निकलने वाला रस) सुबह में पीना जाइज़ है, लेकिन धुप पड़ने के बाद उस में झाग-फिन नशा पैदा हो जाता है इसलिए धुप पड़ने के बाद पीने से नशा पैदा न हुवा हो तो भी बचना चाहिए, कियूं के लोगों के बदगुमान होने का और खुद नशा वाला भी पीने में मुब्तला होने का अंदेशा-दर है.

अपने आप को तोहमत और खतरे की जगाह से बचने का भी हुक्म है

माखुज़ अज़ किताबुल फतावा ६/१६४

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़

२७ रबीउल अव्वल १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

हमारे वालिद साहब दुकान पर ‘दिवाली के दिये आँगन के रंग‘ लाइटिंग, पूजा की घंटि, सिन्दूर बेचते है.

कया ये चीज़ें बेचना जाइज़ है? आमदनी हलाल है?

जवाब:  حامدا و مصلیا و مسلما

इन तमाम चीज़ों का जाइज़ ईस्तिअमाल भी है, और ये चीज़ें दूसरे कामों में भी ईस्तिअमाल हो सकती है.

लिहाज़ा उस के नाजाइज़ ईस्तिअमाल की ज़िम्मेदारी बेचने वाले पर नहीं है, बल्के ईस्तिअमाल करने वाले पर है.

लिहाज़ा इन चीज़ों का बेचना जाइज़ और आम्दानी हलाल होगी।

फतवा कास्मिया जिल्द २९ सफा ३२४ से ३२७

बा हवाला शामी और अशबाह से माखूज़

अलबत्ताह दिवाली के मोके पर इन चीज़ों के बेचने से बचना बेहतर है।

किताबं नवाज़िल १०/२२७ से माखूज़

و الله اعلم بالصواب

 

ऐसे मरीज़ जो मरने के क़रीब हो, उसकी दिल की हरकत को और साँस को जारी रखने के लिए उसकी मशीनरी लगायी जाती है, उस मशीनरी को हटा दिया जाये तो मरीज़ मर जाता है, और मशीनरी कई दिन तक लगी रहती है, और मरीज़ के बचने की उम्मीद न होने के बावजूद हॉस्पिटल का बिल बनते रहता है।

तो क्या ‘साँस जारी रखने की मशीन‘ को हटाना जाइज़ है ?

कहीं ये “साँस जारी रखने की मशीन” को हटाना क़त्ल के हुक्म में तो नहीं ?

जवाब:   حامدا و مصلیا و مسلما

ऐसे मरीज़ के जिस्म से ज़िन्दगी बाक़ी रखने के मशीन लगाए गए हो, अगर उसके दिमाग का कामकाज मुकम्मल तौर पर बंध हो जाए और ३ माहिर जानकार डॉक्टर इस पर मुत्तफ़िक़ (एकमत, सहमत) हो के अब यह कामकाज दोबारह शुरुआ नहीं हो सकेगा तो उस मरीज़ के जिस्म से लगी हुयी “साँस जारी रखने की मशीन” हटा लेना दुरुस्त है.

चाहे उस मशीन की वजह से मरीज़ में दिल की हरकत और साँस का निज़ाम बाक़ी हो.

अल्बत्ताह मरीज़ की मौत शर’अन उस वक़्त से मोअतबर मानी जाएगी जब उन मशीनरी के हटाने के बाद दिल और साँस अपना काम बंद कर दें.

असरे हाज़िर के पेचीदह मसाइल का शरई हल

मुरत्तिब क़ाज़ी मुजाहिदुल इस्लाम साहब रहमतुल्लाहि अलय्हि सफह १८९ / बा हवाला : फ़तवा ज़करियाः ६/७३२

अगर मरीज़ “साँस जारी रखने की मशीन” पर हो और डॉक्टर ने मरीज़ की ज़िन्दगी और फिटरी (कुदरती) तौर पर सांस का निज़ाम दोबारह चालु होने से मायुसी ज़ाहिर कर दी तो वरसा के लिए जाइज़ होगा के “साँस जारी रखने की मशीन” अलाहिदा कर दें।

नए मसाइल और इस्लामी फ़िक़ह ए ऐकेडमी के फैसले। सफह २१९

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारिख :२२ मुहर्रमुल हराम १४४० हिजरी

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

लड़कों को शहवत की निग़ाह से देखना कैसा है?

शरीअत में इस बारे में क्या रहनुमाई है?

जवाब:   حامدا و مصلیا و مسلما

‘लड़कों को देखने का हुक्म‘

अगर लड़का अमरद है याने उसके मूंछ के बाल फ़ुट चुके हैं और दाढ़ी नहीं है ऐसे लड़कों का हुक्म ब’आज़ उलमा के नज़दीक औरत की तरह है उसका सर से पैर तक का जिस्म छुपाने के क़ाबिल है।

“लड़कों को देखने का हुक्म“

इबनुल क़त्तन रहमतुल्लाही अलय्हि फ़रमाते हैं जिस लड़के की दाढ़ी नहीं निकली लुत्फ़ अन्दाज़ होने और लज़्ज़त पाने की नज़र से देखना हराम है। अगर लज़्ज़त मक़्सद न हो और देखने वाले को फ़िटने से इत्मिनान हो तो जाइज़ है।

“लड़कों को देखने का हुक्म“

रद्द्दुल मुहतर १/२८५

अगर जिन्सी मिलन का खतरा हो तो औरत और बगैर दाढ़ीवाले लड़के पर नज़र डालना हराम है।

“लड़कों को देखने का हुक्म“

रद्द्दुल मुहतर १/२८५

हया और पाक दामनी २५६

و الله اعلم بالصواب

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन

उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

⭕आज का सवाल न.२५५२⭕

जिसमे हराम जानवर की चरबी मिलायी गयी हो उस खाने पीने की चीजों में “E” के साथ खास कोड नंबर आते है, जो मेसेज से भी चलाये जाते है, उसके खाने का क्या हुक्म है ?
उसकी तहक़ीक़ हो तो भी बताने की दरखास्त।

🔵जवाब🔵

حامداومصلیاومسلما

शरीयत ने जीन चीजों को हराम करार दिया है अगर उनकी हकीकत और माहिय्यत असलियत [उसका रंग खुशबू ज़ाइक़ा / उसकी अहम् सिफ़तें / गुन] किसी किमियाइ [केमिकल] डालने से बदल जाये तो उनका पहला हुक्म [हराम मकरूह होने का] बाक़ी नहीं रहता।

किसी चीज़ की वह खास और बुनयादी सिफ़तें – गुन जिन से उस चीज़ की पहचान होती है, वोही उस चीज़ की हकीकत और माहिय्यत -असलिय्यत होती है।

इस्लामिक फ़िक़ह अकादमी इंडिया के सामने फन के माहिरीन -(मास्टर्स) खास जानकारी रखने वाले के ज़रिये जो तहक़ीक़ सामने आयी है उस के मुताबिक़ (अगर वह कोड जेलेटिन के है तो) जेलेटिन में उन जानवरों की खालों और हड्डियों की हकीकत बाकी नहीं रहती है, जिन कोलेजन (एक क़िस्म का प्रोटीन) से जेलेटिन बनाया जाता है, बल्कि वह एक नयी हकीकत के साथ नयी -अलग चीज़ हो जाती है, इसलिए उस के इस्तेमाल की गुंजाईश है।

📚(नये मसाइल और फ़िक़ह अकादमी के फैसले, सफा १८२)
१४ वाँ – फिक़ही सेमिनार हैदराबाद २२ जून २००४)

अगर कोड लगी हुई चीज़ों में चर्बी की चिकनाहट बिलकुल नहीं है तो वह चीज़ हलाल है, जैसे बाज़ क्रीम बगैर की बिस्कुट के बारे में मशहूर है के उस में ख़िन्ज़ीर की चरबी डाली गई है और उस पर उस का कोड भी है, लेकीन उस बिस्कुट में चरबी की ज़र्रा बराबर चिकनाहट मव्जूद नहीं तो वह बिस्कुट हलाल है,
अगर उस में चरबी डाली भी गई हो तो प्रोसेस की वजह से उसका असर बिलकुल बाकी नहीं है।

(अज़ अहक़र)
“अगर कोई कंपनी हराम खाना बनाने में मशहूर न हो तो महज़ किसी मख़सूस कोड या किसी कंपनी की चीज़ होने की वजह से किसी चीज़ को शरीअत में हराम या हलाल क़रार नहीं दिया जा सकता, मगर ये के यक़ीन के साथ ये बात मालूम हो जाये के उस “ई कोड” के अज्ज़ा ए तरकिबियाह [ingredients] (डाली गयी चीजें)
में कोई चीज़ हराम है, और किसी किमयावी [केमिकल] के तरीक़ह से उस की हकीकत और माहियत [असलियत] को तब्दील नहीं किया गया तो उस चीज़ से बचना लाज़िम होगा।

जब के तक़वा का तकाज़ाह ये है के जिस चीज़ की हुरमत व हिल्लत में शक हो तो उसे इसतीमाल में लाने से बचना चाहिए।

📚(अहम् मसाइल ६ / २९८)

👇अहकर का तजुर्बा👇
बगैर क्रीम के बिस्कुट और केक में तो बिलकुल शुबह-शक न करे।
मैने इंडिया कि मैग्गी नूडल्स और मेग्गी सॉस का सुरत में लेबोरेटरी रिपोर्ट करवाया था, जिस पर वह हराम कहा जाने वाला कोड है और नूड्ल्स का तो वीडियो भी चला था,
लेकिन इंडिया की मेग्गी सॉस के रिपोर्ट में किसी भी एनिमल का फेट न होना आया है।

जीसेसे मालूम हुवा के यह बातें बाज़ डॉक्टर या दीनी जज़्बात रखने वाले गैर मुफ़्ती की चलायी हुयी है।
जीस्का शरीअत में ऐतबार नहीं।

 तब्दीले माहिय्यत की मिसालें :

हक़ीक़त बदलने से ना-पाक और हराम चीज़ के हलाल होने की चंद मिसालें जो फ़िक़ह की अक्सर किताबों में हैं।

१।
ना-पाक चर्बी से जब साबुन बन जाता है तो उसकी हकीकत बदल गयी इसलिये पाक है।

📗 फ़तावा महमूदिया जदीद १८/२०६ बा हवाला शामी)

२।
गोबर और पाख़ाना जल कर राख हो जाये तो पाक है।

३।
गधा, नमक की कान-खान-बड़े खड्डे में गिर कर, मर कर, सड़ कर, आखीर में नमक बन गया या इंसान की नाश क़बर में मिटटी बन गयी तो वह मिटटी पाक है, उस मिटटी से भरे हुवे कपडे में नमाज़ जाइज़ है।

४।
हराम जानवर की खाल को केमिकल नमक वगैरह के ज़रिये उसकी चिकनाहट ख़त्म कर दी उस खाल से बने लिबास-कोट में नमाज़ जाइज़ है।

५।
शराब नमक या किसी चीज़ के ड़ालने से सिरकह बन गयी उसका नशा ही न रहा पाक है, पी सकते है।

📘 मुस्तफ़द अज़ मालाबुद्द मिनहु सफा २१

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नंबर २५७५⭕

जानदार की तस्वीर वाले कपडोँ, डिब्बे, बॉक्स, मोबाइल कवर, अख्बार, किताबें बेचना कैसा है?

🔵आज का जवाब🔵

حامد ومصلیا و مسلما

जानदार की तस्वीर वाली मज़्कूरह ए बाला (ऊपर ज़िक्र की गयी) चीज़ों को बेचना जाइज़ है।

कयूं के उसमे तस्वीर मक़सूद नहीं होती, तस्वीर ताब’न ज़िमनन (गैर मक़सूद ) होती है, असल मक़सद उस चीज़ को खरीदना और बेचना होता है, लिहाज़ा उसका बेचना जाइज़ है।

अगर ख़रीदने वाले का मक़सद उस चीज़ की तस्वीर हो तो वह खुद गुनेहगार है, बेचने वाला नहीं।

📘इस्लाम और जदीद म’आशी मसाइल ४/१७,१८

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल न.२५७६⭕

१. बच्चों को खेलने के लिए गुड़िया दे सकते है या नहीं और गुड़िया घर रखना कैसा है ?

२. गुड़िया बेचना कैसा है ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا و مسلما

१. अगर गुड़िया या कोई खिलौना ऐसी है के उस में जानदार शक्लो सूरत बनी हुई नहीं तो खेलने देने और घर में रखने में कोई हरज नहीं.
अगर जानदार की शक्लो सूरत बनी हुई हो तो उस को बच्चो को देना या घर में रखना मना है.

📗फतावा महमूदियाः १९ /५०३

हज़रत आइशा रदिअल्लाहु अन्हा के पास जो गुड़िया थी उस के बारे में एक क़ौल तो ये है के वह कपडे की थी, जिस में आँख नाक वगैरह से शक्लो सूरत बनी हुई न थी,
दूसरा क़ौल ये है के ये गज़्वाह ए ख़ंदक़ और खैबर पहले की बात है, बाद में जानदार की तस्वीर वगैरह के हलाल होने का हुक्म मंसूख- (कैंसल) हो गया.

📙फतावा कास्मियाह २४/५७१
📘जवाहिरूल फ़िक़ह जदीद ७/२५० से माखूज़

२. बच्चों की गुड़िया (डोल) या टेडी बेयर जिसमें तस्वीर ही असल मकसूद होती है लिहाजा उसका खरीदना बेचना जाइज नही।

📚किताबुन नवाजील १//४१५
बा हवाला शामी जकरिया ७/४७८


و الله اعلم بالصواب

⭕आज का सवाल नंबर २५७७⭕

बेचने वाला अगर अपनी चीज की तारीफ करे मसलन,
यह भैंस १५ लीटर दूध देती है,
यह गाडी ८० किलोमीटर की एवरेज देती है, वगैरह.. …
और हकीकत में वोह चीज ऐसी न निकले, तो इस तरह धोखा हुवा।
तो ख़रीदने वाले को इसमें वापसी का इख़्तियार होगा ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا و مسلما

हां, खरीदने वाले को इसमें इख़्तियार होगा के बे’अ (मुआमला, सौदा) फ़स्ख़- केनसल) कर दे।
क्यूँकि इसमें बेचने वाले की तरफ से धोखा दिया गया है, और ख़रीदने वाले का वस्फ़ ए मरगुब (पसन्दीदाह) सिफ़त और गुन फ़ौत हुआ।

लेकिन ख़रीदने वाला जब बेची हुई चीज़ लेना ही चाहे, फ़स्ख़ (केनसल) पर राज़ी न हो तो अब उसको पूरी क़ीमत पर ही लेना होगा, क़ीमत कम नहीं करवा सकता, इसलिए के वस्फ़ (अच्छाई) के फ़ौत होने पर दाम कम नहीं किया जाता।

कयूंकि अवसाफ (अच्छाइयों) के मुक़ाबला में दाम का कोई हिस्सा शरीअत में नहीं आता है।

अलबत्ताह बेचने वाला खुद समझ दारी से राज़ी ख़ुशी से कीमत कम कर दे तो हरज नहीं, के पूरे पैसे लेना उसका हक़ है, और आदमी अपना हक़ कम कर सकता है।

📕फ़िक्हुल ज़वाबित २/७६।

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नं. २५४४⭕

जनाजे की नमाज जुता, चप्पल पहेन कर पढ़ना है या उतार कर ?

🔵 जवाब 🔵

حامد و مصلیا و مسلما

आजकल बाज लोग जनाजा की नमाज जूते, चप्पल पहेने हुए पढ़ते है, उनके लिये जरूरी है के वोह जिस जगह खड़े हो वोह जगह और जूते, चप्पल दोनो पाक हो वरना उनकी नमाज नहीँ होगी।
📗बहीश्ती गौहर

और अगर जुता चप्पल पैर से निकाल दिया जाये और उसपर खड़े हो तो सिर्फ जूते, चप्पल के ऊपर का हिस्सा जो पैर से मिला हो उसका पाक होना जरूरी है, अगरचे तलीया नापाक हो।

निज इस सूरत मेँ वोह जमीन भी नापाक हो तो हर्ज नहीँ।

लिहाजा जूता, चप्पल निकालने की सूरत ऐहतियात वाली है।

📘बहीश्ती गौहर, ईम्दादुल अहकाम
📗अहकामे मय्यत, सफा नं.६२

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नं. २५७१⭕

जिन लोगों की आमदनी हराम है उनके यहां नौकरी करना जायज है या नहीं..?
इसी तरह उनको अपनी कोई चीज बेचकर उनसे पैसे लेना कैसा है..?

🔵 जवाब 🔵

حامدا و مصلیا و مسلما

जिनकी आमदनी/आवक खालिस हराम है जैसे सूद लेना, शराब बेचना, जीना के लिये लड़कियों का इन्तेजाम करना वगैरह तो उनके यहां नौकरी जायज नहीं और जो तनख्वाह उसमें से मिलती है वो हलाल नहीं. इसी तरह अपनी चीज उनके हाथ बेचकर उसी माले हराम से कीमत लेना भी हलाल नहीं.

हां.. जिन लोगों की आमदनी शकवाली या हराम और हलाल मिक्स/मिलीजुली हो यानी हराम चीज भी बेचते है और हलाल चीज भी, लेकिन हलाल चीज ज्यादा बेचते है या हराम के साथ दूसरा कारोबार भी है और उसकी आमदनी ज्यादा है उस वक़्त उनके यहां नौकरी करना और अपनी चीज उनके हाथ बेचना जायज है, बशर्ते के तनख्वाह या कीमत हलाल माल से दे उस माल से दे जिसमें हलाल ज्यादा हो, अगरचे येह ऐसा तकवा के खिलाफ है. (यानी ऐसा पैसा लेने से बचना तकवा और बेहतर है)

📘 जदीद मुआमलात के शरई अहकाम १/२४९

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नंबर २५७२⭕

हवाई जहाज़ में मुर्ग के गोश्त की बिरयानी वगैरह खा सकते है या नहीं ? क्यों के हलाल न होने का शक रहता है।

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

मुस्लिम ममालिक के मुस्लिम कंपनी के हवाई जहाज़ में गोश्त की बिरयानी और गोश्त का सालन खाना जाइज़ है।

और गैर मुस्लिम ममालिक या गैर मुस्लिम कंपनी के हवाई जहाज़ में गोश्त खाने के बारे में एहतियात बेहतर है।

अगर हवाई जहाज़ का स्टाफ इस बात को वाज़िह कर दे के हलाल गोश्त है, और दिल मुत्मइन है तो खा सकते है।

📗 फ़तावा कास्मियाह २४/८०

و الله اعلم بالصواب

⭕आज का सवाल नंबर २५७८⭕

हिन्दु भरवाड़-(बकरे पालने और बेचनेवाला) से जिस की दुकान पर किसी मुस्लिम का पेहरा या निगरानी नहीं होती तो ऐसी दुकान से गोश्त ख़रीद कर ईस्तिअमाल करना जब के उस को किसी मुसलमान ने ज़बह किया हो तो कया हुक्म है ?

🔵जवाब🔵

जब कोई मुस्लिम निगरान वहां मव्जूद नहीं तो दारोमदार उस गैर मुस्लिम के क़ौल पर रेह गया के ये हलाल गोश्त है।

हराम और हलाल होने में गैर मुस्लिम का क़ौल शरअन कबूल नहीं।

अल्बत्ताह मुआमलात (खरीदना बेचना लेना देना) में उस का क़ौल भी कबूल है, जब के उस के सच्चे होने का गुमान हो। अगर वह ये कहे के ये वह गोश्त है जिस को फूला मुस्लिम शख्स ने ज़बह किया है और दिल गवाही दे के ये सहीह केहता है और इस ने उस में कोई नाजाइज़ गोश्त नहीं मिलाया है तो उस का क़ौल-बात कबूल कर लेना दुरुस्त है।

📕(आलमगीरी ५/३०८)
📗 फतावा महमूदिया दाभेल १८/३८

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नंबर २५९१⭕

ओरत टीचिंग कर सकती है?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

पढ़ने वाली औरतें, या छोटे बच्चे हो तो तालीम दे सकती है।

अगर बड़े लड़के हो तो परदे के शराइत का लिहाज़ करते हुवे फ़ितने का अंदेशा न हो तो गुंजाईश है।

बाशर्त के तालीम जाइज़ उमूर-कामों की होनी चाहिये।

📕महमूदुल फ़तावा ८/२८

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नंबर २६०७ (हिस्सा १)⭕

रास्ते में कोई चीज़ मिली या दुकान पर कोई ग्राहक कोई चीज़ भूल गया और वह मिली तो उसका शरीअत में कया हुक्म है ?
इसे लेकर रख लेना कैसा है ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا و مسلما

ऐसी चीज़ अगर रस्ते में मिली और यह दर है के यह चीज़ जाए’अ हो जायेगी या कोई ले लेगा और असल मालिक तक नहीं पहुंचायेगा तो उसको मालिक तक पहोंचाने की निय्यत से उठा लेना और मालिक तक पहुंचाना वाजिब है।

अगर ग़ालिब गुमान है के उसका मालिक खुद तलाश करेगा तो वह चीज़ उसीको मिल जाएगी, यह चीज़ जाए’अ नहीं होगी, तो नहीं उठाना चाहिए।

न उठाने से गुनेहगार न होगा।

लेकिन इस सुरत में भी अगर उठा लिया तो असल मालिक तक पहुंचाना वाजिब है, खुद रख लेना दुरुस्त नहीं।

📗दरसी बहिश्ती ज़ेवर सफा ४७० से माखूज़

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नंबर २६१०⭕

तावीज़ धागा करना जायज़ हे या नाजायज़ ?
और इसमें शरीयत का क्या हुक्म हे??

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا و مسلما

 किसी को नुकसान पहुँचाने के लिए जो तावीज़ किये जाते है उनका हुक्म वही हे जो जादू टोना का हे, के इनका करना और कराना हराम और कबीरा गुनाह हे, बल्कि इससे कुफ़्र का अंदेशा हे।

अलबत्ता तावीज अगर किसी जाइज़ मक़सद के लिए किया जाये तो जाइज़ हे, इसकी ३ शर्तें है।

१- किसी जाइज़ मक़सद के लिए हो, नाजाइज़ मक़सद के लिए न हो।

२- इसके अलफ़ाज़ कुफ़्र और शिर्क पर मुश्तमिल न हो, यानि इसमें कोई गुनाह, शिर्क की बात न लिखी हो, और जिनका मफ़हूम मालूम न हो तो नाजाइज़ हे।

३- इनको मो’अस्सीर बिज़्ज़ात (असल तावीज़ ही में ताक़त है) न समझा जाए, इनकी तासीर भी अल्लाह के हुक्म के ताँबे है।

🔷बेहतरीन अमल 🔷

 १- बेहतर ये हे के तावीज़ वगेरा से दूरी रखे और दुआओ का अहतमाम करे,
(तावीज़ तो उन बच्चो के लिए होता हे जो दुआए नहीं मांग सकते के लिख कर उनके गले में लटका दिया जाए, जो दुआए माँग सकते है अपनी हर परेशानी को दुआओ के ज़रिये हल कराये)

 २- तावीज़ के माना पनाह तलब करना हे, और हर मुसलमान मर्द, औरत के लिए बेहतरीन तावीज़ हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद, सुरह इखलास ( कुल्हुवल्लाह) सुरह फ़लक़, सुरह नास और आयतल कुर्सी पढ़ना है।

 ३- इसी तरह “मंज़िल” जो क़ुरआने करीम की आयात है, नज़र, जादु, आसेब-जिन्नात का असर वगेरा से हिफाज़त का बेहतरीन अमल है।

📗आपके मसाइल और उनका हल, जिल्द-१, सफा ३५०

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नंबर २६११⭕

ज़ैद २ लाख रुपये उमर से उधार ले रहा है, और कहता है के एक साल के बाद २ लाख के बदले २.५० (ढाई लाख) दूंगा।
पचास हज़ार हदीये में अपनी ख़ुशी से दुँगा, तो ज़ैद से यह पैसे लेना उमर के लिए जाइज़ है ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما

ज़ैद से यह पैसे लेना और देना दोनों सूद है, लिहाज़ा जाइज़ नहीं।

📗महमूदुल फ़तवा ८/३६२

و الله اعلم بالصواب

⭕आज का सवाल नंबर – २६१३⭕

मदँ और औरत जब पाक है तो उनकी शमँगाह का जाहिरी हीस्सा पाक है या नापाक?                                 
अगर हमबिस्तरी के दौरान मदँ औरत को अपनी शमँगाह मुँह मे देवे, या चाटे ,या चटवाये उसकी शमँगाह चुमे तो जाईज है या नहीं?
ऐसे मसाइल पूछने में शमँ महसूस होती है लेकिन जरुरतन दरीयाफत किया है   माफ   फरमाईयें  ।         

  🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا مسلما
     
हजरत सैयद मुफती अबदुरँरहिम लाजपुरी रहमतुललाहअलैयही तहरीर फरमाते है की,  दिन  के मसाईल और अहकाम दरियाफत करने मे शमँ व हया को आड़ न बनाना चाहिए. अगर शमँ व हया का लिहाज कर के दिनी अहकाम की मालूमात ना की जाऐ तो शरई अहकाम का ईलम कैसे होगा?   
कुरआन मे है, “अल्लाह तआला हक बात कहने मे किसी का लिहाज नहीं करते”
बेशक़  शमँगाह का जाहीरी हिस्सा पाक है लेकिन ये जरुरी नहीं की हर पाक चीज़ को मुँह लगाया जाये, और मुँह मे लिया जावे, उसको चुमा जाए ओर चाटा जाए ….
नाक की रुतुबात , नीक,सेंड पाक है तो क्या नाक के अंदरुनी हिस्से को जबान लगाना ओर उसके रुतुबात को मुंह मे लैना पसंदीदा आदत हो सकती है? ओर उसकी ईजाजत हो सकती है?
पाखाना की जगह का जाहिरी हिस्सा भी नापाक नहीं. पाक है तो क्या उसको भी चुमने चाटना की ईजाजत  होगी? !!!!!
नहीं  हरगिज़ नहीं…… 
ईसी तरह मदँ की अपनी शमँगाह औरत के मुँह मे देना जाईज नहीं. शख्त मकरुह व गुनाह है………     
जिस मुंह से वह अल्लाह का नाम लेती है ‘क़ुरआन पढ़ती है, हुजुर सल्ललाहु अलयही व सल्लम पर दुरुद शरीफ पढ़ती हे ऊस मुंह मे नापाकी देने को कैसे गवारा किया जा सकता है?  असतगफिरुललाह………..             
शायर कहता हैं.
(फारसी शेर का तजुँमा)                                           
हजार बार घौऐ अपने मुंह को मुश्क व गुलाब से़.                                
फीरभी तेरा नाम लैना बहुत ही बेअदबी है.                                    

ये गैर कौमौ का कलचर है । ओर प्रिंट ओर ईलेकटोनीक मीडिया की गलत इस्तेमाल की नहूसत है. जो इस्लामी मिजाज़ के बिलकुल खिलाफ़ है. शमँगाह चुमना कुतौं / बकरो वगैरह हैवानीयत की खसलत के मुसाबह कॉपी है. ओर  मुंह मे देना तो अैसी बुरी चीज़ है की नर जानवर भी अपनी माँदाओ के साथ ऐसा नहीं करते….                    
ये तो उस सुरत मे जब मदँ की शमँगाह की सख्ती पैदा ना हुई हो … ओर सख्ती पैदा हो गई हो फिर बीवी की मुँह मे शमँगाह दी जाये तो मज़ी ( मनी से पहले निकलने वाला पानी) का निकलना यकीनी है. और मज़ी गलीज़ नजासत ओर सखत नापाक है. 
नापाकी को मुँह मे देना और लेना हराम हे.  ओर आज कल की गैरौं की तहज़ीब की नक़ल कर के मुखमैथुन करना यानी मुंह मे मनी खारिज करना सख्त हराम ओर ईऩ्तेहाई घीनौवनी हरकत है ।

📗 फतावा रहीमीयह जीलद 10/178 ब हवाला  आलमारी हजफौ ईजाफे के साथ.
                                          
📕जामिया बिनौरीया आजमाया.  कराची.  सीरियल नं.  9868.              
 अल्लाह तआला पूरी उम्मतकी  गैरौंकी तहज़ीब और मीडिया के गलत इस्तेमाल से पुरी हिफाज़त फरमाए …… आमीन..

و الله اعلم بالصواب

 

⭕आज का सवाल नंबर २६१८⭕

हिन्दुओं के त्यौहार गरबा (नवरात्रि) में शिरकत करना कैसा है ?

🔵जवाब🔵

حامدا و مصلیا و مسلما

नवरात्रि हिन्दुओं का मज़हबी त्यौहार है, जिसमें वह अम्बा देवी की मूर्ति या तस्वीर के तवाफ़ (चक्कर) लगा कर उसकी पूजा करते हैं, इसमें शिरकत करना गैरुल्लाह को पूजने के बराबर गुनाह है, जो कुफ़्र और सख्त गुनाह है।

काबा शरीफ के अलावह किसी भी चीज़ का तवाफ़ जाइज़ नहीं है, कुफ़्र के अलावह म्यूज़िक, गाना गाना या सुनना, बद-निगाही, ग़ैरों के साथ ताल्लुक़ात वगैरह कई गुनाह में मुब्तला होने का ज़रिया है।

लिहाज़ा इस में शिरकत करना इमान बरबाद करना और हराम है।
و الله اعلم بالصواب