१७७२ औरत के लिए हज के सफ़र का हुकम

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औरत के लिए हज के सफ़र का हुकम

आज का सवाल नंबर १७७२

(१)
ओरत को हज के सफर के बारे में क्या हुक्म है ?
(२)
महरम किसे कहते है ?

जवाब
حامدا و مصلیا و مسلما

[१]
ओरत के लिए बगैर महरम के सफर करना शरअन जाइज़ नहीं है, इस लिए वो हज पर क़ादिर उस वक़्त समजी जाएगी जब के उसके साथ कोई महरम हज करने वाला हो। चाहे महरम अपने खर्च से हज कर रहा हो या यह औरत उसका खर्च बर्दाश्त करे, इसी तरह वहां पहुँचने के लिए रास्ता अमन वाला होना भी ताक़त का एक हिस्सा है, अगर रास्ता में बद-अमनी, जान-माल का कवी [पक्का] खतरा हो तो हज की ताक़त नहीं समजी जाएगी।

माअरिफुल क़ुरान-२/१२२ से माखूज

[२]
महरम से मुराद वो शख्स है जिनके साथ निकाह हराम है, चाहे नसब की वजह से, या सुसराली या दूध के रिश्ते की वजह से, जैसे भाई-बहन, भांजा-भांजी, भतीजा-भतीजी, और उनकी औलाद, सास-ससुऱ, दामाद-बहु, ये सब महरम है।

नीज़ महरम का मुअतमद [भरोसे के क़ाबिल] आक़िल [अक़लमंद] बालिग़ और फ़िटने और शहवत का खतरा न होना भी शरत है।

फतावा रहीमियह, किताबुल फिकह, मुअल्लिमुल हुज्जाज

औरत के लिए खालु [मासा], फुफा, अपने शोहर के भतीजे और भांजे, अपने बहनोइ, देवर, जेठ, महरम नहीं है।

फ़तावा रहीमियह-८/३०७
आप के मसाइल ४/८४ से माखूज

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
२२~शव्वाल उल मुकररम~१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

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