१८०५ चंद आदमी का हुज़ूर ﷺ या रिश्तेदार मरहूम की तरफ से से नफ्ली क़ुरबानी करना बाप का अपने घरवालों की तरफ से क़ुरबानी करना

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चंद आदमी का हुज़ूर ﷺ या रिश्तेदार मरहूम की तरफ से से नफ्ली क़ुरबानी करना
बाप का अपने घरवालों की तरफ से क़ुरबानी करना

आज का सवाल नंबर १८०५

A एक से जाइद आदमी मिलकर हुज़ूर ﷺ की तरफ से या अपने मरहूम रिश्तेदार की तरफ से क़ुरबानी करें तो  क़ुरबानी सब की तरफ से सहीह होगी के नहीं ? बा हवाला जवाब दें.

B बाप अपने बच्चों और घर वालों की तरफ से हर साल क़ुरबानी करता है तो घरवालों की या बच्चों की इजाज़त लेना ज़रूरी है ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

A हाँ एक से जाइद आदमी हुज़ूर ﷺ या रिश्तेदार मरहूम की तरफ से क़ुरबानी करें तो इस्तिहसनन (ख़िलाफ़े क़ियास मस्लिहतन) नफ्ली इसाले सवाब की निय्यत से क़ुरबानी सहीह हो जाएगी।

फतावा महमूदिया दाभेल १७/३२६ ब हवाला दुर्रे मुख़्तार  
फतावा रहीमिययह दारुल इशात १०/५७ 
किताबुन नवाज़िल १४/५२७ से ५२९

وان مات احدالسبعة وقال الورثة اذبحوا عنه وعنكم صح عن الكل استحسانا لقصد القربة من القربة .  شامي جلد 6/326کتاب الاضحیہ سعید

B अगर बाप का मामूल है के वो हर साल अपने बीवी बच्चों की तरफ से क़ुरबानी करता है तो सब की तरफ से क़ुरबानी दुरुस्त है, घर वालों ने इजाज़त दी हो या न दी हो.

हाँ अगर हर साल बच्चों की तरफ से क़ुरबानी करने का मामूल नहीं है बल्कि कभी कभी बड़े बच्चे अपनी क़ुरबानी खुद भी कर लेते है तो उन की इजाज़त लेना ज़रूरी है वरना क़ुरबानी सहीह नहीं होगी.

किताबुल मसाइल २२७ से माखूज

و الله اعلم بالصواب

ईस्लामी तारीख
२५~ज़िलक़दह~१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

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