१८१४ क़ुरबानी के दिनों में गरीब या मालदार होना

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क़ुरबानी के दिनों में गरीब या मालदार होना

आज का सवाल न. १८१४

१. एक आदमी मालदार था लेकिन क़ुरबानी के दिन आने से पहले गरीब हो गया तो क्या उस पर क़ुरबानी वाजिब हे ?

२. एक आदमी गरीब था लेकिन क़ुरबानी के दिनों में मालदार हो गया तो क्या उस पर क़ुरबानी वाजिब हे ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

१. क़ुरबानी के दिनों में गरीब हो गया यानि साहिबे निसाब नहीं रहा तो इस पर क़ुरबानी वाजिब नहीं.

२. जो पहले फ़क़ीर था, क़ुरबानी के दिनों में या क़ुरबानी के तीसरे दिन आखरी वक़्त में भी मालदार हो गया तो उस पर क़ुरबानी वाजिब हे.
मुस्तफ़द किताबुल मसाइल २/२२२

و الله اعلم بالصواب

इस्लामी तारीख़
०५~ज़िल हिज्जह~१४४०~हिज़री

मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन.
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

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