१८२१ क़ुरबानी की खाल का हुक्म

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क़ुरबानी की खाल का हुक्म

आज का सवाल न. १८२१

१.
क़ुरबानी की खाल अपने काम में ला सकते हैं ? खुद रख सकते हैं ?

२.
क़ुरबानी के जानवर की खाल मस्जिद मदरसा में दे सकते हैं ?

३.
इमाम साहब और मुअज़्ज़िन साहब को खाल दे सकते हैं ?

जवाब

حامدا و مصلیا و مسلما

१.
जी हा, क़ुरबानी की खाल अपने इस्तेमाल में ला सकते हैं, अगर बेच दें तो फिर इसकी क़ीमत गरीब को देना लाज़िम होती है.

किताबुल मसाइल २/२५०

२.
जानवर की खाल जब तक बेचे नहीं तब तक वह गोश्त की तरह है और उसी के हुक्म है यानी आप जिस तरह गोश्त किसी को भी दे सकते हैं उसी तरह खाल भी दे सकते हैं.(फिर जिसको खाल दे दी वह चाहे तो बेच सकता है) अलबत्ता अगर पैसो से बेच दें तो फिर वह ज़कात की तरह हो जाती है. यानी अब उसको गरीब मुस्तहिक़ लोगो को मालिक बना कर देना ज़रूरी है. मस्जिद में खाल नहीं दे सकते क्यों के उसमे कोई मालिक नहीं बन रहा है और मदरसा में देना जाइज़ बल्कि अफ़ज़ल है के वह खाल बेचकर उसके पैसे मदरसा में पढ़ने वाले बच्चों पर खर्च किये जाते हैं (उसका और इल्म को फैलाने का सवाब आप को भी मिलेगा) इसी तरह दूसरी कोई तंज़ीम जमात को देने का यही हुक्म है के अगर वह बेच कर गरीबो को पैसे या किताबें कपडे मकान मालिक बना कर देते हैं तो उनको दे सकते हैं वरना नहीं. यानी मालिक बनाकर नहीं देता बल्कि इन चीज़ों को किराये से या सिर्फ फ्री में इस्तेमाल के लिए देते है या उस रक़म को खुद जमात के कामों में बतौर क़र्ज़ इस्तेमाल करते रहते हैं तो ऐसी तंज़ीम व जमात को नहीं देना चाहिए.और खाल बेचने के बाद यह पैसे गरीबों को जहां तक हो सके जल्द से जल्द मालिक बना कर देकर अपनी ज़िम्मेदारी से छुटकारा हासिल करे, शरई वजह बगैर ताख़ीर करना कराहट-मकरूह होने से खाली नहीं.

मुस्तफ़द अज़  आप के मसाइल और उन का हल ५/४६६
फतावा रहीमियह करांची १०/४२ से मुस्तफ़द

३.
इमाम मुअज़्ज़िन वगेरा हज़रात को उनकी तनखाह में खाल नहीं दे सकते, की तनखाह और उजरत अलग से है, ऐसे ही ख़ुशी से दे रहे हैं तो दे सकते हैं. (और वह हज़रात बेच कर उसके पैसे इस्तेमाल कर सकते हैं)

मुस्तफ़द अज़ आप के मसाइल और उन का हल ५/४६६

मौलाना इब्राहिम अल्यानी साहब

و الله اعلم بالصواب

तस्दीक़
मुफ़्ती इमरान इस्माइल मेमन
उस्ताज़े दारुल उलूम रामपुरा, सूरत, गुजरात, इंडिया.

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